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मेट्रो सिटी के बच्चे गांव की संस्कृति और परंपराओं से होंगे रूबरू, दिल्ली-मुंबई से पहुंचे रांची

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द फॉलोअप डेस्क
शहर के हाई सोसाइटी में पलने वाले बच्चों को गांव की संस्कृति से जोड़ने के लिये IIM ( इंडियन इंस्टीटूट ऑफ़ मनैजमेंट ) की ओर से यंग चेंजमेकर प्रोग्राम का आयोजन किया गया है। शहर में पढ़ने वाले बच्चे गांव के कल्चर को करीब से सीख व समझ सके इसके लिए यह प्रोग्राम किया जा रहा है। इसके तहत मुंबई, दिल्ली और पुणे जैसे देश के मेट्रो शहर के स्टूडेंट्स को झारखंड के गांवों में ले जाया जागा। जिसके लिये 10वीं और 12वीं के कुल 100 विद्यर्थियों को चुना गया है। इस कार्यक्रम की शुरुआत पुंदाग स्थित आईआईएम परिसर में शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय मिश्रा ने की। मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए उन्होंने इसकी सराहना भी की। इधर, कल यानि 27 मई से अगले तीन दिनों के लिए मेट्रो सिटी से आए स्टूडेंट्स को रांची से 18 किमी दूर अनगड़ा ब्लॉक के रसाबेड़ा गांव ले जाया जागा। इसके लिये IIM उन्हें परिशिक्षण दे रहा है। इसके अलावा गांव जा रहे स्टूडेंट्स के साथ मेंटर के तौर पर IIM के सीनियर छात्रों को भी शामिल किया गया हैमेंटर उन्हें गांव की रहन-सहन से जुड़ी सारी पहलुओं को बारीकी से सिखाएंगे जिससे शहरी बच्चे गांव के वातावरण को आसानी से समझ सकेंगे।

चीफ जस्टिस संजय मिश्रा ने बताया यूनिक आईडिया
IIM के इस प्रोग्राम के उद्घाटन के बाद झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय मिश्रा ने द फॉलोअप से बातचीत में इस प्रोग्राम जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है की कल को अगर हमारे बच्चे आगे चलकर किसी बड़े कंपनी में मैनेजर, सीनियर मैनेजर या सीईओ बनेंगे तो उनको यह अनुभव नहीं होगा की गांव की लाइफ कैसी होती है वहां की समस्याएं क्या-क्या होती हैं अगर वो इसे नहीं समझ पाए तो उनका एजुकेशन पूरा नहीं होगा। शहर के बच्चों को गांव से जोड़ने का यह एक यूनिक आइडिया होगा। उन्होंने यह भी कहा लीगल अवेयरनेस के लिए हर सेक्टर में लीगल सेल होनी चाहिए जिससे वो कानून के छोटे से छोटे नियमों से जागरूक रहें। जैसे पब्लिक प्लेस पर स्मोकिंग नहीं करना चाहिए। आम लोगों को भी इन कानूनों के बारे में जानना चाहिए।

बच्चों में दिखा उत्साह, कहा- गांव में रहने का होगा पहला अनुभव
यंग चेंजमेकर प्रोग्राम के तहत जिन स्टूडेंट्स का चयन हुआ है वे बेहद उत्साहित नजर आए। उनका कहना है कि किसी गांव जाकर वहां की रोजमर्रा की जिंदगी को देखने व सीखने का पहला अवसर है। गांव में आमतौर शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी समस्याओं के समाधान पर चर्चा करेंगे। इसके लिये उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई हैउन्होंने कहा की जिस प्रकार आईआईएम ने उन्हें गांव के कल्चर को सीखने और समझने का मौका दिया उसी तरह हमलोग भी वहां के गरीब बच्चों से जुड़कर उन्हें समाज के प्रति जागरूक करेंगे।

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