नंदलाल तुरी
सीपीआई(एम) नेत्री बृंदा करात सोमवार को पाकुड़ पहुंचीं और पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में बिहार विधानसभा चुनाव, चुनाव आयोग की भूमिका तथा झारखंड की मौजूदा परिस्थितियों पर अपनी बात रखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार चुनाव के दौरान मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का खुलेआम उल्लंघन हुआ और चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा।
करात ने कहा कि चुनाव आयोग ने चुनाव से पहले एसआईआर के नाम पर ऐसा प्रचार किया, जिसका उद्देश्य उल्टा जनता पर ही जिम्मेदारी डालना था कि वे साबित करें कि वे इस देश के वोटर कैसे हैं। उन्होंने इसे लाखों मजदूरों के लिए बेहद अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री सहित भाजपा के कई मंत्री चुनाव प्रचार में खुले तौर पर विभाजनकारी भाषण दे रहे थे, लेकिन निर्वाचन आयोग ने किसी को नोटिस तक नहीं जारी की।
उन्होंने कहा कि मतदान से एक दिन पहले बिहार की महिलाओं को 10-10 हजार रुपये योजनाओं के नाम पर दिए गए, जिसे उन्होंने आचार संहिता का गंभीर उल्लंघन करार दिया और चुनाव आयोग को ‘बीजेपी कमीशन’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया। करात ने कहा कि बिहार चुनाव ने साबित कर दिया है कि जनता को सतर्क और सचेत रहने की आवश्यकता है। झारखंड की राजनीति पर बात करते हुए बृंदा करात ने कहा कि भाजपा बिहार की तरह झारखंड में भी विभाजनकारी राजनीति करने और अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश करेगी। उन्होंने झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार से सभी दलों के साथ बैठक कर मजबूत वैकल्पिक नीति लागू करने की जरूरत पर बल दिया।
कोयला मुद्दों पर बोलते हुए करात ने कहा कि पाकुड़ में कोल इंडिया अपनी जिम्मेदारियों से पीछे हटती जा रही है और निजी कंपनियों को काम सौंपकर खुलेआम लूट की स्थिति पैदा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला कंपनियां नियमों का पालन नहीं कर रहीं और ग्रामीणों का शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि सीपीआई(एम) जल्द ही कोल इंडिया के खिलाफ आंदोलन शुरू करेगी और झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित सभी दलों एवं संगठनों से इस आंदोलन में समर्थन देने की अपील की।