द फॉलोअप डेस्क
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने शनिवार को सदन को बताया कि रेड बर्ड एयरवेज को राज्य में वीआईपी और वीवीआईपी उड़ान के लिए छह महीने तक कांट्रैक्ट देने का फैसला होल्ड पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि कैबिनेट की बैठक में कांट्रैक्ट देने पर चर्चा की गयी थी। लेकिन मुख्यमंत्री के साथ चर्चा के बाद कांट्रैक्ट देने पर कैबिनेट की स्वीकृति का मामला होल्ड पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि एयर एंबुलेंस के दुर्घटना में सात लोग मारे गए थे। यह बहुत ही पीड़ादायक है। सूचना मिलने पर वह वहां गए थे। लोगों से मिले भी थे। दुर्घटना में मारे गए सभी सात लोगों को सरकार मुआवजा दिया जाएगा। दुर्घटना की जांच के लिए उन्होंने लिखा है। डीजीसीए इसकी जांच कर रहा है। सरकार इस दुर्घटना को लेकर काफी गंभीर है। यहां मालूम हो कि 12 मार्च को कैबिनेट की हुई बैठक में रेड बर्ड एयरवेज को राज्य में वीवीआईपी उड़ान का संचालन करने के कांट्रैक्ट को छह महीने तक विस्तार देने पर सहमति बनी थी। प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कैबिनेट एवं नागर विमानन की अपर मुख्य सचिव वंदना डाडेल ने इसकी जानकारी भी दी थी।
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कुशवाहा शशिभूषण मेहता के सवाल पर सरकारी हेलीकॉप्टर और चार्टर विमानों के उपयोग और परिचालन पर जम कर चर्चा और बहस हुई। मेहता ने पूछा था कि राज्य सरकार निजी एजेंसियों से हेलीकॉप्टर और विमान किराये पर लेकर उनका इस्तेमाल कर रही है, जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। तो क्या सरकार अपना हेलीकॉप्टर या विमान खरीदने का विचार रखती है। विपक्ष के भी कई विधायकों ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को अपनी सुविधा और खर्च की बचत के लिए अपना हेलीकॉप्टर या विमान खरीदने की दीर्घ कालिक योजना पर विचार करना चाहिए। हालांकि प्रभारी मंत्री मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि नया हेलीकॉप्टर खरीदना फिलहाल व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि एक हेलीकॉप्टर की कीमत 80 से 100 करोड़ रुपए के बीच होती है, जबकि उसके रखरखाव, पायलटों की नियुक्ति और तकनीकी संचालन पर भी भारी खर्च आता है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे कई राज्य भी निजी एजेंसियों से ही ऐसी सेवाएं लेते हैं।
