गढ़वा
झारखंड में जहां एक ओर खाकी वर्दी पर कई मामलों को लेकर सवाल उठते रहे हैं, वहीं गढ़वा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने पुलिस विभाग की छवि को नई पहचान दी है. गढ़वा पुलिस में कार्यरत जवान सुमेर चौधरी इन दिनों अपने सराहनीय कार्यों को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं. दिन में कोर्ट की ड्यूटी निभाने वाले सुमेर चौधरी ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी आराम नहीं करते, बल्कि शाम को सड़क पर उतरकर ट्रैफिक व्यवस्था संभालते हैं और लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करते हैं. उनका उद्देश्य सिर्फ एक है सड़क हादसों में लोगों की जान बचाना.
कोर्ट ड्यूटी के बाद शाम में सड़क पर देते है सेवा
गढ़वा जिले के लगमा पेट्रोल पंप के पास एनएच-39 पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और रॉन्ग साइड ड्राइविंग से होने वाली मौतों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया. बीते एक महीने में इस स्थान पर कई लोगों की जान जा चुकी है. ऐसी स्थिति को देखते हुए सुमेर चौधरी ने खुद पहल करते हुए सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया. कोर्ट में मॉर्निंग शिफ्ट की ड्यूटी पूरी करने के बाद वह प्रतिदिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक हाईवे पर खड़े होकर लोगों को यातायात नियमों का पालन करने, हेलमेट पहनने और रॉन्ग साइड से वाहन नहीं चलाने की सलाह देते हैं. साथ ही राहगीरों को दुर्घटना के समय घायल लोगों की मदद के लिए आगे आने के लिए भी प्रेरित करते हैं.
सड़क हादसों में लोगों की जान बचाना मेरा उद्देश्य: सुमेर चौधरी
सुमेर चौधरी का कहना है कि यदि उनके प्रयास से एक भी व्यक्ति की जान बचती है, तो यही उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य होगा. उनका मानना है कि दुर्घटना के बाद पुलिस या एंबुलेंस को घटनास्थल तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है, लेकिन यदि आसपास मौजूद लोग तुरंत मदद करें तो कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं. कर्तव्य से बढ़कर मानवता की सेवा में जुटे सुमेर चौधरी की इस पहल का स्थानीय लोग भी खुलकर समर्थन कर रहे हैं. उनकी जागरूकता मुहिम का असर अब सड़क पर भी दिखाई देने लगा है और लोग धीरे-धीरे यातायात नियमों का पालन करने लगे हैं. गढ़वा के जवान सुमेर चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि पुलिस की असली पहचान सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि समाज और मानवता की रक्षा करना भी है.
