द फॉलोअप डेस्क
बरसात के दिनों में कश्मीर के पहलगाम जैसी खूबसूरती का अहसास कराने वाली हजारीबाग की जुलजुल यानी सीतागढ़ पहाड़ी अब गंदगी और असामाजिक गतिविधियों से बदहाल हो चुकी है। शराब की बोतलें, प्लास्टिक और कचरे के ढेर ने इस पर्यटन स्थल की खूबसूरती बिगाड़ दी थी। लेकिन अब ग्रामीणों ने कमान संभाल ली है।
हजारीबाग जिले की जुलजुल पहाड़ी, जिसे स्थानीय लोग सीतागढ़ भी कहते हैं, पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। कन्हरी हिल के बाद दूसरा बड़ा पर्यटन स्थल मानी जाने वाली यह पहाड़ी बारिश के मौसम में हरियाली और प्राकृतिक नजारों से सजी रहती है। लेकिन हाल के दिनों में यहां गंदगी का अंबार लग गया। शराबखोरी, प्लास्टिक और तोड़फोड़ ने इस स्थल की छवि धूमिल कर दी। टूटी बोतलों से चरवाहों और मवेशियों को चोट लगना आम हो गया था।
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, मगर जब सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामीण खुद मैदान में उतर आए। रविवार को ग्रामीणों ने पहाड़ी पर सफाई अभियान चलाया। बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और शराब की टूटी बोतलें इकट्ठी कर पहाड़ी को चमका दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि हमने समिति बना ली है। अब पहाड़ी की देखरेख हम करेंगे। प्लास्टिक और गंदगी पर रोक लगेगी। नशाखोरी करने वालों पर सख्त जुर्माना होगा। बैठक में यह भी तय हुआ कि पर्यटकों के प्रवेश से पहले चेकिंग होगी। पार्किंग के लिए एक तय स्थान बनाया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखी जाएगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से यहां नियमित पेट्रोलिंग की भी मांग की है। जुलजुल पहाड़ी की खूबसूरती बचाने की जिम्मेदारी अब ग्रामीणों ने खुद उठा ली है। सवाल यह है कि जब ग्रामीण अपने स्तर से पर्यटन स्थल की रक्षा कर सकते हैं तो क्या प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस दिशा में गंभीर पहल करेंगे?
