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जीविका की तलाश : सच को संजीदगी से परोस रही है उभरते कहानीकार आनंद कुमार की पुस्तक

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द फॉलोअप डेस्क

झारखंड मंत्रालय में प्रशाखा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत आनंद कुमार उभरते कहानीकार के रूप में प्रसिद्धि पा रहे हैं। उनके द्वारा लिखी गई पुस्तक जीविका की तलाश युवाओं को काफी आकर्षित और प्रभावित कर रहा है। इस पुस्तक को पाठक काफी पसंद कर रहे हैं। पुस्तक में भारतीय परिवेश में युवाओं के संघर्ष, त्याग और परिस्थिति जन्य समस्याओं का सजीव चित्रण किया गया है। यह पुस्तक Amazon और flipkart जैसे online प्लेटफार्म पर उपलब्ध है।


   पुस्तक एक मध्यम वर्ग के परिवार के बचपन की रोमांच और युवावस्था में जीविका की तलाश पर आधारित है। सारे संस्मरण सत्य घटनाओं पर आधारित है। पुस्तक मध्यवर्ग के व्यक्ति के सपने और आकांक्षाओं पर आधारित है। एक ग्रेजुएट युवा कैसे सरकारी नौकरी के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ त्याग का निर्मोही हो जाता है। कंप्टीशन की तैयारी के लिए अपना घर-परिवार छोड़ देता है। दर-दर भटकता है।  इस पुस्तक में भावनात्मक चित्रण है। पाठक को कहानियों के माध्यम से युवाओं के मर्म और संघर्ष को समझने में सच अनुभव होता है। इस पुस्तक में न्याय की तलाश नामक कहानी के माध्यम से पूरी भारतीय न्याय व्यवस्था को संजीदगी के परोसा गया है। न्याय व्यवस्था को प्रभावी और व्यवहारिक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।। कुछ एक संस्करण काफी रोचक और हास्य से भरेभी  हैं। बचपन, पर्व- त्यौहार, रीति रिवाज, प्रतियोगिता परीक्षा, शिक्षा, न्यायालय और विवाह के इर्द गिर्द घूमती पुस्तक में समाहित कहानियों का संग्रह पाठक को बांधे रखने के लिए पर्याप्त दिखता है।

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