द फॉलोअप डेस्क
प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि भले ही कोई अतिक्रमण कर अपना घर बनाया है, अगर वह भूमिहीन है तो सरकार उसे नहीं उजाड़े। उसके बसने की व्यवस्था करे। अगर किसी की कहीं जमीन है, जबरन वन भूमि या सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया है तो अलग बात है। लेकिन वैसे गरीब परिवार जिसके पास न घर बनाने के लिए भी जमीन नहीं है, उसके प्रति सरकार को सहानुभूति दिखानी चाहिए। उन्हें दो डिसमिल से कहीं अधिक जमीन दी जानी चाहिए। क्योंकि गांवों में रहनेवाला अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या कोई गरीब परिवार उसी घर में अपना बकरी, सूअर, गाय और मुर्गी भी रखता है। उसे तो इतनी जमीन दी जानी चाहिए कि इन पशु-पक्षियों के अलावा कम से कम सब्जी उपजाने के लिए अपनी जमीन हो। विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि सरकार सात डिसमिल तक जमीन बंदोवस्त कर सकती है। लेकिन जबरन जमीन पर कब्जा करनेवालों को जमीन बंदोवस्त करने का कोई प्रावधान नहीं है।

मरांडी राजद विधायक प्रकाश राम के ध्यानाकर्षण के क्रम में शुक्रवार को उठे सवाल पर पर सरकार को सुझाव दे रहे थे। प्रकाश राम का कहना था किक लातेहार में 40-50 वर्षों से बसे गरीब लोगों को उजाड़ा जा रहा है। चंदनडीह में 266 लोगों को हटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बगैर उजाड़ना कहीं से उपयुक्त नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व में हटाए गए 138 परिवारों को दो-दो डिसमिल जमीन दी गयी है। लेकिन वह जमीन भी वैसे जगह पर दे दी गयी है जहां सरना पूजा होता है। मेला लगता है। लोग वहां जाना नहीं चाहते हैं। इसके अलावा 155 भूमिहीन लोग अभी भी बचे हुए हैं। उन्हें भी पुनर्वासित किया जाना चाहिए। इस संबंध में सीओ ने जो एफिडेफिट किया है, वह गलत है। मंत्री ने कहा कि डीसी के माध्यम से जांच करा कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
