द फॉलोअप डेस्क:
हमने प्रशासनिक अधिकारियों की असंवेदनशीलता के कई किस्से सुने हैं, लेकिन आज एक उपायुक्त की कर्तव्यनिष्ठा का आंखो देखा हाल सुनिए। कहते सुना है कि जिलाधिकारियों का दफ्तर नहीं दरबार होता है, जहां पहुंचना मुश्किल है, लेकिन केवल एक ग्रामीण के फोन कॉल से समस्याओं का निदान होता देखिए. मामला पलामू जिले के मेदिनीनगर प्रखंड अंतर्गत पोलपोल पंचायत के पत्थरचट्टी गांव का है।

ग्रामीणों ने पलामू डीसी को फोन किया था
यहां एक ग्रामीण और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट ने पलामू के जिलाधिकारी दिलीप प्रताप सिहं शेखावत को फोन किया और अपनी समस्या बताई। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में लोग दशकों से औरंगा नदी का पानी पीते हैं, क्योंकि गांव में पेयजल का साधन नहीं है। उन्होंने डीसी से कहा कि गांव में आजादी के इतने साल बाद आज भी बिजली नहीं पहुंची जिसकी वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ग्रामीणों ने पत्थरचट्टी गांव में पक्की सड़क नहीं होने की बात भी जिलाधिकारी से कही।
गांव वालों की शिकायत पर DC का संज्ञान
द फॉलोअप को पलामू के जिला जनसंपर्क अधिकारी डॉ. असीम ने बताया कि जिलाधिकारी ने गांव वालों की शिकायतों पर ना केवल संज्ञान लिया बल्कि तत्काल समाधान का निर्देश दिया। चूंकि, गांव वालों ने बताया कि वे औरंगा नदी का पानी पीते हैं, इसलिए पहली प्राथमिकता में गांव में बोरिंग कराया गया, ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल मिले। जल संसाधन विभाग ने रविवार को ही यह काम संपन्न करा दिया। अब गांव वालों को औरंगा नदी का पानी नहीं पीना पड़ेगा। गांव वाले बीमारी की आशंका में नहीं डरकर नही जीएंगे।
गांव में बिजली व्यवस्था बहाल करने का निर्देश
जिला जनसंपर्क अधिकारी डॉ. असीम ने बताया कि बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता को पत्थरचट्टी गांव में अविलंब बिजली का खंभा और ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली आपूर्ति बहाल करने का निर्देश दिया गया है। पीडब्लूडी विभाग को गांव में पक्की सड़क का निर्माण कराने का निर्देश भी दिया गया है। डीपीआरओ डॉ. असीम ने जानकारी दी है कि पीडब्ल्यूडी विभाग के पदाधिकारी गांव का दौरा करेंगे। वहां जरूरत के हिसाब से पक्की सड़क बनाने का प्रस्ताव तैयार करेंगे और जल्दी इसका निर्माण होगा।
शिकायतों पर संज्ञान का यह मामला मिसाल बन सकता है। यह आम लोगों को जिला प्रशासन और अधिकारियों पर भरोसा मजबूत करेगा। जिलाधिकारी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत के निर्देश पर विभिन्न विभागों ने जिस प्रकार की तत्परता दिखाई है, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है।