द फॉलोअप डेस्क
देशवासी जानना चाहते हैं कि कैसे एक संदिग्ध साख वाला समूह, जिसपर टैक्स हेवन देशों से संचालित विदेशी शेल कंपनियों से संबंधों का आरोप है, भारत की संपत्तियों पर एकाधिपत्य स्थापित कर रहा है। और इस सब पर सरकारी एजेंसियां या तो कोई कार्यवाही नहीं कर रही हैं या इन सब संदिग्ध गतिविधियों को ही सुगम बनाने में जुटी है। देश जानना चाहता है कि प्रधानमंत्री ने एक मित्र पूंजीपति को विश्व के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति बनाने में मदद क्यों की और वे इस गंभीर अंतरराष्ट्रीय खुलासे पर चुप क्यों हैं? उक्त बातें अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने आज कांग्रेस भवन में संवाददाता सम्मेलन में कहीं। इस अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष राजेश ठाकुर, प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद, राकेश सिन्हा, डॉ एम तौसीफ, सतीष पॉल मुंजनी, गजेन्द्र सिंह उपस्थित थे।

इस मुद्दे पर जांच के लिए एक जेपीसी बनाने से क्यों डर रही मोदी सरकार
प्रो. गौरव वल्लभ ने कहा कि हम किसी व्यक्ति के दुनिया के अमीरों की सूची में 609वें से दूसरे स्थान पर पहुंचने के खिलाफ नहीं है। लेकिन हम निस्संदेह सरकार द्वारा प्रायोजित निजी एकाधिकारों के खि़लाफ़ है क्योंकि वे जनता के हितों के विरुद्ध होते हैं। विशेष तौर पर हम टैक्स हेवन देशों से आपत्तिजनक संबंधों, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे एक खास व्यक्ति द्वारा हमारी अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना और राष्ट्रीय संसाधनों का लाभ उठाते हुए एकाधिपत्य स्थापित करने के खि़लाफ़ हैं। हम जानना चाहते हैं कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) बनाने से क्यों डर रही है। जबकि संसद के दोनों सदनों में उसका अच्छा बहुमत है।

14 वर्षों के उच्चतम स्तर 3.83 बिलियन स्विस फ्रैक्स पहुंचा
प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता में आने से पहले काला धन भारत वापस लाने और हर नागरिक के बैंक खाते में 15 लाख रुपए डालने का वादा किया था लेकिन सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। स्विट्ज़रलैंड के केंद्रीय बैंक के पिछले वार्षिक डेटा के मुताबिक 2021 में स्विस बैंकों में जमा भारतीय व्यक्तियों और कंपनियों का पैसा 14 वर्षों के उच्चतम स्तर 3.83 बिलियन स्विस फ्रैक्स (30,500 करोड़ रु. से अधिक) पर पहुंच गया है। जब यह धोखाधड़ी हो रही थी तो सेबी (एसईबीआई) क्या कर रहा था?

अडानी समूह सेबी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए जांच के दायरे में
- अडानी समूह के खि़लाफ़ स्टॉक में हेरफेर के आरोपों के सार्वजनिक होने के बाद शेयरों की कीमतों में गिरावट से उन लाखों निवेशकों को नुकसान पहुंचा जिन्होंने कृत्रिम रूप से बढ़ी हुई कीमतों पर अडानी समूह के शेयरों में निवेश किया था। 24 जनवरी और 15 फरवरी 2023 के बीच अडानी समूह के शेयरों के मूल्य में 10,50,000 करोड़ रु. की गिरावट आई। 19 जुलाई, 2021 को वित्त मंत्रालय ने संसद में स्वीकार किया था कि अडानी समूह सेबी के नियमों का उल्लंघन करने के लिए जांच के दायरे में है। फिर भी अडानी समूह के शेयरों की कीमतों में उछाल क्यों आने दिया गया।
- एलआईसी द्वारा खरीदे गए अडानी समूह के शेयरों का मूल्य 30 दिसंबर, 2022 को 83,000 करोड़ रुपए था जो 15 फ़रवरी, 2023 को घटकर 39,000 करोड़ रुपए रह गया, यानि 30 करोड़ एलआईसी पॉलिसी धारकों की बचत के मूल्य में 44,000 करोड़ रुपए की कमी। शेयरों के मूल्यों में कमी और समूह द्वारा धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों के बाद भी मोदी सरकार ने एलआईसी को अडानी एंटरप्राइज़ेज़ के फ़ॉलो-आन पब्लिक ऑफ़र (एफपीओ) में अतिरिक्त 300 करोड़ रुपए निवेश करने के लिए मजबूर क्यों किया।

संयोग है या प्रयोग ?
- हवाई अड्डे अडानी समूह बहुत ही कम समय में भारत के हवाई अड्डों का सबसे बड़ा संचालक बन गया है। इसने 2019 में छह में से छह हवाई अड्डों के संचालन की अनुमति सरकार से प्राप्त कर ली और 2021 में यह समूह संदेहास्पद परिस्थितियों में भारत के दूसरे सबसे व्यस्त हवाई अड्डे, मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, पर काबिज़ हो गया।
- बंदरगाह - आज अडानी समूह 13 बंदरगाहों और टर्मिनल्स को नियंत्रित करता है, जो भारत की बंदरगाह क्षमता का 30 प्रतिशत और कुल कंटेनर आवाजाही का 40 प्रतिशत है। क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से विवेकपूर्ण है कि धनशोधन और विदेश की शेल कंपनियों से लेन-देन के गंभीर आरोपों का सामना करने वाली एक कंपनी को एक सामरिक क्षेत्र में प्रभुत्व रखने की अनुमति दे दी जाए?
- रक्षा क्षेत्र- यह सार्वजनिक जानकारी में है कि गौतम अडानी प्रधानमंत्री मोदी की अनेक विदेश यात्राओं में उनके साथ गए। 4-6 जुलाई, 2017 की इज़राइल यात्रा के बाद उन्हें भारत-इज़राइल रक्षा संबंधों के संदर्भ में एक लाभ दिलाने वाली भूमिका सौंप दी गई है। उन्होंने कोई पूर्व अनुभव न होते हुए भी ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक्स, छोटे हथियार और विमान रखरखाव जैसे क्षेत्रों में संयुक्त उपक्रम स्थापित किए है, जबकि कई स्टार्ट-अप कंपनियां और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इन क्षेत्रों में कई वर्षों से है।
- विदयुत क्षेत्र यूपीए ने वर्ष 2010 में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी द्वारा बगेरहाट, बांग्लादेश में 1,320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी जी ने अपने मित्रों की मदद करने का निर्णय लिया और 6 जून, 2015 को उनकी ढाका यात्रा के दौरान, यह घोषणा की गई कि अडानी पावर बांग्लादेश को बिजली आपूर्ति करने के लिए झारखंड के गोड्डा में एक धर्मल पावर प्लांट का निर्माण करेंगे।
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