द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग में आतंकियों को शरण देने के आरोप में 23 साल से चले आ रहे मुकदमे में अदालत ने फैसला सुना दिया है। सबूतों के अभाव में जमालुद्दीन उर्फ नासिर को बरी कर दिया गया। यह फैसला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार की अदालत ने सुनाया।
वर्ष 2002 में हजारीबाग के खिरगांव इलाके में लश्कर-ए-तैयबा के 2 आतंकियों को पनाह देने का आरोप नासिर पर लहा था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि नासिर ने आतंकियों को किराए पर कमरा दिलवाया था। इन आतंकियों ने 22 फरवरी 2002 को कलकाता में अमेरिकन इंफॉर्मेशन सेंटर पर हमला किया था और फिर हजारीबाग में छिप गए थे।
पुलिस ने जब इलाके में घेराबंदी की, तो आतंकियों ने फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकि मारे गए। मारे गए आतंकियों की पहचान मो. इदरीस उर्फ जाहिद और सलीम के रूप में हुई थी। इस मामले में सदर थाना प्रभारी कौशल्यानंद चौधरी के बयान पर मामला दर्ज किया गया था। नासिर 2015 से कोलकाता की जेल में बंद था। मुकदमे के दौरान 12 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। बचाव पक्ष के वकील अजीत कुमार ने अदालत में पैरवी की। सबूतों की कमी के चलते कोर्ट ने नासिर को बरी कर दिया।