द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग के कटकमदाग प्रखंड में सरकारी लापरवाही का बड़ा उदाहरण सामने आया है। लगभग 7 करोड़ रुपये की लागत से बना पदाधिकारियों का नवनिर्मित आवासीय भवन पिछले दस वर्षों से खाली पड़ा हुआ है। भवन और परिसर अब झाड़ियों से घिर चुके हैं और धीरे-धीरे जर्जर होते जा रहे हैं।
कटकमदाग प्रखंड में पदाधिकारियों के लिए तैयार किया गया यह आवासीय भवन फरवरी 2019 में विधिवत उद्घाटित हुआ था। उम्मीद थी कि पदाधिकारी यहां रहकर जनता के कार्यों को अधिक सुगमता और त्वरित गति से निपटाएंगे, लेकिन यह उद्देश्य आज तक पूरा नहीं हो सका। कार्यालय तो चल रहा है, लेकिन पदाधिकारी अपने-अपने कक्ष बनाकर कार्य चला रहे हैं, जबकि विशाल आवासीय परिसर आज भी वीरान पड़ा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने वर्षों से बेकार पड़े इस भवन से जनता के धन का दुरुपयोग हुआ है। पदाधिकारियों के आवास में नहीं रहने से प्रखंड क्षेत्र के विकास कार्य और सामान्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। प्रतिनिधियों का आरोप है कि शहर में रहने वाले पदाधिकारी दफ्तर देर से पहुंचते हैं, जिसका सीधा असर जनता को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ता है।
शुरुआत में सुरक्षा कारणों का हवाला देकर पदाधिकारियों ने यहां रहने से इनकार किया था। लेकिन अब प्रखंड कार्यालय से सटा थाना भी पूरी तरह संचालित है और नवनिर्मित थाना भवन में जवान तथा अधिकारी रह भी रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा का तर्क अब बिल्कुल कमजोर पड़ चुका है।
ग्रामीणों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने जिले के वरीय अधिकारियों से मांग की है कि पदाधिकारियों को आवासीय भवन में रहना अनिवार्य किया जाए, ताकि सरकारी संसाधनों का सही उपयोग हो सके और लोगों को समय पर सेवाएं मिल सकें। करोड़ों की लागत से बना यह भवन देखरेख के अभाव में लगातार जर्जर हो रहा है। सवाल यह है कि आखिर कब सरकार और प्रशासन इसकी सुध लेगा, और कब जनता के पैसों से बनी यह सुविधा अपने वास्तविक उद्देश्य को पूरा करेगी?
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