द फॉलोअप डेस्क
पूरे देश में जहां आज विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है, वहीं हजारीबाग में करोड़ों की लागत से बना जनजातीय अध्ययन केंद्र वीरान पड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों को साकार करने के लिए बनाया गया यह सेंटर, सरकारी उदासीनता और प्रशासनिक लापरवाही का शिकार हो गया है।
हजारीबाग के विनोबा भावे विश्वविद्यालय परिसर में बना जनजातीय अध्ययन केंद्र 22 हजार वर्गफुट में फैला है. यह तीन मंजिला भवन है जिसमे चार स्टूडियो, एक क्लासरूम, एक ऑडिटोरियम, डायरेक्टर ऑफिस, ओपन ऑफिस, लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब और शौचालय है. लेकिन अफसोस यह भवन आज भी खाली पड़ा है।
17 फरवरी 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजारीबाग आगमन के दौरान इस सेंटर का ऑनलाइन शिलान्यास किया था। इसे देश का दूसरा ट्राइबल स्टडी सेंटर बनना था, जिसका मकसद आदिवासी समाज पर शोध कार्य और छात्रों को इस क्षेत्र में प्रेरित करना था।
लेकिन करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद, सरकारी रवैये के कारण यहां अब तक पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। इस सेंटर के निर्माण में हजारीबाग के तत्कालीन भाजपा सांसद जयंत सिन्हा की भी अहम भूमिका रही। लेकिन भवन हैंडओवर न होने और प्रशासनिक उदासीनता के चलते, यह सेंटर आज सिर्फ एक शोपीस बनकर रह गया है।
सरकार एक ओर आदिवासी समाज के उत्थान की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर उनसे जुड़े अध्ययन केंद्र की उपेक्षा करना कई सवाल खड़े करता है। करोड़ों की लागत से बना यह जनजातीय अध्ययन केंद्र, जिम्मेदारों की लापरवाही की एक जीवंत मिसाल है। सवाल सिर्फ यह है कि करोड़ों का यह प्रोजेक्ट कब आदिवासी समाज के लिए वास्तव में उपयोगी साबित होगा
और प्रधानमंत्री का सपना कब पूरा होगा।