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पाकुड़ में 3 सूत्री मांगों को लेकर 84 दिन से हड़ताल पर बैठे हैं रोजगार सेवक, सरकार से हैं नाराज!

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पाकुड़:

पाकुड़ में झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के बैनर तले रोजगार सेवक अपनी 3 सूत्री मांगों को लेकर डीसी ऑफिस के बाहर 12 मार्च से ही अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। सोमवार, 1 जून को इसका 84वां दिन था। आरोप है कि उनकी मांगों पर उचित सुनवाई नहीं हो रही है।

मनरेगा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संतोष कुमार ने कहा कि "हम 84 दिन से हड़ताल पर बैठे हैं, लेकिन सरकार हमारी आवाज नहीं सुन पा रही है। शायद बहरी हो गई है। हम नहीं जानते कि आगे क्या होने वाला है। उनकी मंशा शायद आगे पता चलेगा। यदि सरकार हमारी बात नहीं सुनती तो अगले चुनाव में बहिष्कार करेंगे। यदि हम सरकार बनाना जानते हैं, तो उसे गिराना भी जानते हैं। पाकुड़ जिले में एक भी रोजगार सेवक ड्यूटी पर नहीं है। फील्ड का सारा काम रुका हुआ है"। उन्होंने कहा कि मजदूरों के पेट पर लात मारने वाली सरकार बहुत निकम्मी है।

 

रोजगार सेवकों की 3 सूत्री मांगें क्या हैं!
रोजगार सेवकों की मांग है कि उन्हें ग्रेड-पे के सात स्थायी समायोजन मिले। मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा पर नौकरी मिले और उचित मुआवजा देने का प्रावधान किया जाए। रोजगार सेवकों का धरना प्रदर्शन 84 दिन से जारी है। इनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।

संघ के जिला उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने मांगें दोहराते हुए कहा कि "सरकार हमारी मांगों पर सुनवाई नहीं कर रही है। 2 साल पहले सरकार के साथ लिखित समझौता हुआ था, लेकिन उसकी शर्तों का भी पालन नहीं किया गया। सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई का निर्देश सभी जिलों के उपायुक्त को भेजा है कि रोजगार सेवकों पर काम पर बुलाया जाए। सरकार यह नहीं समझती कि हमारी समस्या क्या है। 10-12 हजार रुपये के मानदेय में घर चलाना कितना मुश्किल है, हम ही जानते हैं। कई कर्मियों को बकाया मानदेय भी नहीं मिला है"। 

काफी कम मानदेय पर कार्यरत हैं रोजगार सेवक
धरना प्रदर्शन कर रहे सारथी मुर्मू ने कहा कि "रोजगार सेवक काफी कम मानदेय पर काम कर रहे हैं। इससे परिवार की आजीविका चलाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि हमलोग 12 मार्च से हड़ताल पर बैठे हुए हैं। हमारी  3 सूत्री मांगें हैं। सरकार ने हमारे लिए आज तक कुछ नहीं किया। सरकार को हम बताना चाहते हैं कि इतने अल्प मानदेय में हमें काम करना पड़ता है। ब्लॉक में सारी योजनाओं में हमें काम करना होता है। कम मानदेय में आजीविका चलाना मुश्किल है। सरकार को हमारी मांगों पर सकारात्मक रहकर उचित निर्णय लेना चाहिए"। 

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