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पलामू में मुखिया पर PM आवास और मंईयां सम्मान योजना की राशि गबन का आरोप, BDO ने शुरू की जांच

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द फॉलोअप डेस्क
पलामू जिले के छतरपुर प्रखंड अंतर्गत सिलदाग पंचायत के मुखिया उमेश यादव पर पीएम आवास योजना और मंईयां सम्मान योजना की राशि को लाभुक के खाते से फर्जी तरीके से निकाल लेने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस संबंध में पंचायत के चौखड़ा गांव की निवासी लाभुक प्रभा देवी ने बीडीओ और स्थानीय थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
प्रभा देवी ने आरोप लगाया है कि मुखिया उमेश यादव ने पीएम आवास योजना की राशि दिलाने के नाम पर उन्हें पोस्ट ऑफिस ले जाकर आधार कार्ड के माध्यम से एक नया खाता खुलवाया। इस दौरान उनके खाते में मुखिया ने अपना मोबाइल नंबर जुड़वा लिया, जिसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

प्रभा देवी ने बताया कि गांव की अन्य महिलाओं को जब मंईयां सम्मान योजना की राशि मिली तो वह भी 8 अक्टूबर को पोस्ट ऑफिस में अपने खाते की जानकारी लेने पहुंची। वहां मौजूद कर्मचारी ने बताया कि उनके खाते में 25 हजार रुपये जमा हैं, जिसमें से 10 हजार रुपये की निकासी की गई और 15 हजार शेष हैं। जब वह 10 अक्टूबर को पैसे निकालने दोबारा गईं, तो उन्हें जानकारी मिली कि उनके खाते की पूरी राशि मोबाइल ऐप के माध्यम से किसी अन्नू कुमारी के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है। इतना ही नहीं, उनके खाते से अन्य राशि भी अनु कुमारी और शोभा कुमारी के खातों में ट्रांसफर की गई है।
इसके बाद प्रभा देवी ने जब अपने खाते का मिनी स्टेटमेंट निकलवाया तो पता चला कि उनके खाते में पीएम आवास योजना की दूसरी किस्त के रूप में 75 हजार रुपये और मंईयां सम्मान योजना के तहत 5 हजार रुपये जमा किए गए थे, जिन्हें फर्जी तरीके से फोन-पे ऐप के माध्यम से मुखिया द्वारा अपने रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर कर लिया गया।
इतना ही नहीं, प्रभा देवी ने यह भी आरोप लगाया है कि मुखिया की पत्नी कुसुम देवी, जो उसी पंचायत की स्वयंसेविका हैं, उन्होंने पीएम आवास योजना की दूसरी किस्त के भुगतान के लिए एक अन्य लाभुक के घर के सामने अपनी सास को खड़ा कर जियो टैग कराया और इस तरह फर्जी तरीके से राशि की निकासी कर अपने पति का सहयोग किया। आरोप यह भी है कि जिन खातों में पैसे ट्रांसफर किए गए, वे खाते भी मुखिया के परिजनों के हैं।
इस मामले की शिकायत मिलने के बाद बीडीओ आशीष कुमार साहू ने जांच शुरू की। जांच में यह सामने आया कि प्रभा देवी को पहले अबुआ आवास योजना के तहत चयनित किया गया था और पहले किस्त के रूप में 30 हजार रुपये का भुगतान किया गया था। बाद में उन्हें पीएम आवास योजना के तहत भी चयनित कर लिया गया, जिसके तहत उन्हें पहले किस्त के रूप में 40 हजार और दूसरी किस्त के रूप में 75 हजार रुपये का भुगतान किया गया। हालांकि, इन सभी राशियों की निकासी लाभुक द्वारा नहीं, बल्कि मुखिया द्वारा फर्जी तरीके से की गई।
बीडीओ आशीष कुमार साहू ने कहा कि एक ही लाभुक को दो योजनाओं का लाभ दे दिया गया है, इसलिए एक योजना की राशि वापस ली जाएगी। साथ ही, मुखिया पर लगे आरोपों की जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। वहीं, मुखिया उमेश यादव ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि पैसे किसके खाते में ट्रांसफर किए गए हैं, इसकी जांच की जा रही है और अगर किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है, तो राशि वापस कराई जाएगी। यह मामला प्रशासन और ग्रामीण विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसे लेकर प्रशासन सख्त कार्रवाई की बात कर रहा है।


 

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