रांची:
मुख्यमंत्री ने बीते बजट सत्र में सदन में कहा था कि 1932 के खतियान पर आधारित स्थानीय नीति नहीं बन सकती। झारखंड में बीते कई महीनों से 1932 के खतियान तथा इसपर आधारित नियोजन और स्थानीय नीति की चर्चा है। इसी बीच झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरन्नाथ महतो ने 1932 के खतियान पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ये झारखंड की बपौती है।
1932 का खतियान झामुमो का प्रमुख एजेंडा
शिक्षा मंत्री जगरन्नाथ महतो ने कहा कि 1921 के खतियान पर आधारित स्थानीय और नियोजन नीति झारखंड मुक्ति मोर्चा का प्रमुख चुनावी एजेंडा था। झारखंड मुक्ति मोर्चा इसे लागू करने के पक्ष में है। गठबंधन सरकार की वजह से थोड़ी दिक्कत आ रही है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि झारखंड के लोगों का 1932 के खतियान पर आधारित नियोजन और स्थानीय नीति पर बपौती अधिकार है। इसे कोई भी नहीं रोक सकता। जो लोग इसका विरोध कर रहे हैं वो छुटभैया नेता हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर किया पलटवार
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भोजपुरी, मैथिली, अंगिका और मगही के समर्थन में बयान दिया था। इसी पर शिक्षा मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। लोबिन हेंब्रम और सीता सोरेन के बगावती तेवर पर जगरन्नाथ महतो ने कहा कि झामुमो में सब ठीक है। शिबू सोरेन पार्टी के सर्वेसर्वा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं।
सरकार में उथल-पुथल पर दिया ये बयान
जगरन्नाथ महतो ने कहा कि सरकार में कांग्रेस कोटे से कौन मंत्री होगा, ये कांग्रेस को ही तय करना है। सरकार पर इस बात से कुछ फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हाईकमान और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव जैसे बड़े नेताओं की सहमति और नेतृत्व में गठबंधन हुआ है। किसी के कुछ बोलने से सरकार पर असर नहीं होगा।