रांची
JLKM नेता और डुमरी विधायक जयराम महतो ने जमशेदपुर के बिष्टुपुर में देर रात आमजन पर पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आमलोगों की पुलिस द्वारा पिटाई की कड़ी निंदा की है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जयराम महतो ने कहा कि कानून का राज इसलिए होता है, ताकि रात के 12 बजे भी कोई परिवार बिना डर के फिल्म देखकर घर लौट सके, मार्केटिंग कर सके या किसी दुकान पर बैठकर एक कप चाय-कॉफी पी सके। नागरिकों को सुरक्षा देना पुलिस की जिम्मेदारी है, उन्हें डराना नहीं। उन्होंने कहा कि बीती रात जमशेदपुर के बिष्टुपुर में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के अनुसार रात 10:30 से 11:30 बजे के बीच दुकानों में चाय पी रहे, कोई आइसक्रीम खा रहे या खरीदारी के लिए बाहर निकले आमलोगों पर बिष्टुपुर पुलिस द्वारा अचानक बिना सूचना दिए लाठी बरसाने का मामला सामने आया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन आम नागरिकों के साथ मारपीट किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है।

डंडा चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए
जयराम महतो ने कहा कि वायरल वीडियो में शांतिपूर्ण नागरिकों पर डंडा चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पुलिस के आला अधिकारियों को इस पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए कि निर्दोष लोगों को क्यों पीटा जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर रात में बाजारों में निकलना अपराध है तो जिला प्रशासन आमलोगों पर लाठी चलाने और बेरहमी से पिटाई करने के बजाय शहर में स्पष्ट नियम और आवश्यक प्रतिबंध क्यों नहीं लागू करता। पुलिस इतनी लाचार है तो नियम बना दे कि शाम 7 बजे के बाद दुकानें बंद कर दी जाएं और घर से निकलने के लिए पुलिस से अनुमति लेनी होगी। जयराम महतो ने कहा कि पुलिस को अपना पावर दिखाना ही है तो बेकाबू हो चुके अपराध और अपराधियों पर दिखाए। जो लोग नशाबाजी को लेकर अड्डेबाजी करते हैं, उनके खिलाफ जरूर सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि जमशेदपुर एक औद्योगिक शहर है। लोग देर रात तक फैक्ट्रियों में शिफ्ट करते हैं, काम करते हैं और फिर अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताने बाहर निकलते हैं। उन्हें सुरक्षा चाहिए, पुलिस की लाठी नहीं।
देश-दुनिया में गलत संदेश जायेगा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए जयराम महतो ने कहा कि आपकी सरकार विदेशों में जाकर निवेशकों को झारखंड में निवेश के लिए आमंत्रित कर एमओयू कर रही है। यदि अपराधियों पर नियंत्रण के बजाय बाजार बंद करवाए जाएं और आम नागरिकों को रात में सड़कों पर निकलने से लाठी से पिटाई और डराया जाए, तो इससे देश-दुनिया में जमशेदपुर और झारखंड की कानून-व्यवस्था को लेकर क्या संदेश जाएगा। उन्होंने जमशेदपुर में अपराध की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस की गाड़ी से खींचकर हत्या की घटना सामने आती है, दिनदहाड़े बैंक लूटे जा रहे हैं और रेस्टोरेंट में घुसकर अपराधी ताबड़तोड़ फायरिंग करके आसानी से फरार हो जाते हैं। अपराधियों में पुलिस का खौफ दिखाई नहीं देता। अपराधी पुलिस के नाक के नीचे से अपराध करता है और पुलिस देखती रह जाती है। उन्होंने इसे पुलिस की नाकामी बताया। जयराम महतो ने सवाल किया कि जब अपराधियों पर कार्रवाई करने की बात आती है तो क्या आम जनता पर डंडा चलाकर अपनी ताकत दिखाना ही पुलिसिंग है। उन्होंने कहा कि दिन में बैंक लूटे जा रहे हैं, चोरी, गोलीबारी, हत्या, दुष्कर्म और महिलाओं के गले से चेन छीनतई की घटनाएं हो रही हैं तो क्या स्कूल, बाजार और फैक्ट्रियां भी बंद करा दी जाएंगी। लोगों को घरों में बंद कर देने से अपराध खत्म नहीं होंगे।
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उठाये ये सवाल
उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के नाम पर चाय पी रहे लोगों पर लाठी से पिटाई करने से कानून-व्यवस्था बेहतर नहीं होगी। एक तरफ राज्य सरकार की अनुमति से देर रात 11 बजे तक बार और शराब की दुकानें खुलती हैं, दूसरी तरफ चाय-आइसक्रीम खाने वाले आमलोगों पर डंडे बरसाए जाते हैं। आखिर कौन सा कानून पुलिस को शांतिपूर्ण नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार करने का अधिकार देता है? क्या रात में दुकान पर चाय-कॉफी पीना या परिवार के साथ बाहर निकलना अपराध है? उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो में एक दुकान के बाहर महिलाएं भी डरी-सहमी दिखाई दे रही हैं और उनके सामने पुलिसकर्मी लाठियां भांजते नजर आ रहे हैं। दुकानें बंद करवाकर और लोगों की पिटाई कर घरों में भेजकर पुलिस अपनी नाकामी छिपा नहीं सकती। इससे जनता के मन में कानून के प्रति सम्मान नहीं, बल्कि भय और अविश्वास पैदा होगा। जयराम महतो ने कहा कि जमशेदपुर की गंभीर परिस्थितियों को देखकर नब्बे दशक की याद आने लगी है, जब रात होते ही बाजारों में सन्नाटा छा जाता था और लोगों को घर से निकलने में डर लगता था। उन्होंने कहा कि अपराधी खुलेआम अपराध करके निकल जाएं और उसका खामियाजा आम जनता भुगते, यह कानून का राज नहीं हो सकता।
