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जामताड़ा के लाल ने रचा इतिहास : दूध विक्रेता का बेटा बना जिला टॉपर, सेना में अधिकारी बनने का है सपना

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जामताड़ा
कहते हैं कि अगर हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो संसाधनों की कमी कभी सफलता के आड़े नहीं आती। इस कहावत को जामताड़ा के एक साधारण परिवार के बेटे ने अपनी मेधा से चरितार्थ कर दिखाया है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा घोषित 12वीं आर्ट्स के नतीजों में आर. के. प्लस टू हाई स्कूल, मिहिजाम के छात्र प्रवीण कुमार यादव ने सफलता का परचम लहराया है। प्रवीण ने 500 में से 463 अंक (92.6%) हासिल कर न केवल अपने स्कूल का मान बढ़ाया, बल्कि पूरे जामताड़ा जिले में प्रथम स्थान प्राप्त कर 'जिला टॉपर' का खिताब अपने नाम किया।साधारण पृष्ठभूमि और असाधारण संघर्ष
प्रवीण की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे संघर्ष और सादगी की एक प्रेरणादायक कहानी छिपी है। उनके पिता, फकीरा यादव, एक साधारण दूध व्यापारी हैं। कड़ाके की धूप हो या ठिठुरती ठंड, वे दिन-भर कड़ी मेहनत कर दूध बेचते हैं ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई के बीच आर्थिक तंगी दीवार न बन सके। उनकी माता, शोभा देवी, एक कुशल गृहणी हैं, जिन्होंने घर के सीमित संसाधनों के बावजूद प्रवीण के लिए पढ़ाई का एक अनुशासित और सकारात्मक माहौल तैयार किया। आज जब मेरिट लिस्ट में प्रवीण का नाम सबसे ऊपर चमका, तो माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। फकीरा यादव ने भावुक होते हुए कहा, "बेटे की सफलता ने आज मेरी सारी थकान मिटा दी है। उसने साबित कर दिया कि अभावों में भी ऊंचे सपने देखे और पूरे किए जा सकते हैं।
​लक्ष्य: सीमा पर देश की सुरक्षा
​जहाँ अधिकांश टॉपर्स प्रशासनिक सेवा (IAS/IPS) या कॉर्पोरेट जगत के बड़े पैकेजों की ओर आकर्षित होते हैं, वहीं प्रवीण की सोच जरा हटकर है। अपनी सफलता का श्रेय शिक्षकों और माता-पिता को देते हुए प्रवीण ने स्पष्ट किया कि उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय सेना में एक 'आर्मी ऑफिसर' बनना है। वे अपनी मेधा और अनुशासन का उपयोग राष्ट्र की रक्षा के लिए करना चाहते हैं।​सफलता का संक्षिप्त विवरण
​नाम: प्रवीण कुमार यादव
​प्राप्तांक: 463/500 (92.6%)
​स्थान: जामताड़ा जिला टॉपर (आर्ट्स स्ट्रीम)
​पारिवारिक पृष्ठभूमि: पिता (दूध व्यापारी), माता (गृहणी)
​सपना: भारतीय सेना में अधिकारी बननाप्रवीण की यह गौरवगाथा जामताड़ा के उन हजारों युवाओं के लिए एक मशाल है, जो विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। प्रवीण ने यह संदेश दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो सफलता का मार्ग स्वयं प्रशस्त हो जाता है।

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