logo

जामताड़ा के इस स्कूल में मौत के साए में भविष्य, जर्जर खपरैल भवन में पढ़ने को मजबूर 118 बच्चे

कपोज.jpg

दीपक झा/ जामताड़ा
जामताड़ा प्रखंड अंतर्गत उदलबनी पंचायत से शिक्षा व्यवस्था की एक डरावनी तस्वीर सामने आई है। यहां के राजकीय कृत मध्य विद्यालय, आसनचूहा में 118 मासूम बच्चों का भविष्य और जीवन दोनों दांव पर लगे हैं। 1952 में बना यह विद्यालय आज भी पुराने खपरैल के भवन में संचालित हो रहा है, जिसकी दीवारों में दरार आ चुकी हैं। भवन केवल भगवान भरोसे टिका हुआ है। ​भवन की स्थिति इतनी जर्जर है कि बारिश होते ही कमरों में पानी टपकने लगता है, जिससे पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाती है। विद्यालय के शिक्षकों और बच्चों के अनुसार, क्लास चलते समय कई बार छत से खपरैल गिर चुके हैं, जिससे बच्चे चोटिल भी हुए हैं। बच्चों का कहना है कि उन्हें हर वक्त डर सताता है कि स्कूल की इमारत कभी भी गिर सकती है।


​गोचर जमीन का पेंच और विभाग की सुस्ती
​प्रभारी प्रधानाध्यापक हरिप्रसाद राम ने बताया कि विद्यालय का वर्तमान भवन गोचर जमीन पर होने के कारण नई बिल्डिंग के निर्माण में तकनीकी बाधा आ रही है। वहीं ने ग्रामीण ने कहा कि बदलनामा के तहत दूसरी जमीन देने को हम लोग तैयार हैं तैयार हैं। सरकारी अमीन द्वारा जमीन की नापी भी कई साल पहले की जा चुकी है, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण फाइलें आज भी दफ्तरों में धूल फांक रही हैं।


​बड़े हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन?
​विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने जिले के डीसी से लेकर शिक्षा विभाग के तमाम अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि प्रशासन शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है। यदि समय रहते नए भवन का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह विभाग की होगी।

Tags - Jamtara School Infrastructure Rural India Safety Government School