द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में सीसी की सरकार चल रही है. इस सरकार में एमबीए लोग गांव के विकास में नजर गड़ाए हुए है. केंद्र द्वारा भेजे गए पैसों पर इनके पैनी नजर है. अब आप सोच रहे होंगे कि सीसी क्या है और एमबीए क्या है. दरअसल आज पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने प्रेस वार्ता कर यह सारी बात कही है. उन्होंने बताया कि सीसी का मतलब है कट-कमीशन और एमबीए में एम फॉर मंत्री, बी फॉर बिचौलिया और A फॉर अधिकारी है. उनके अनुसार राज्य में कट-कमीशन की सरकार चल रही है और मंत्री, बिचौलिया और अधिकारी दबाकर केंद्र द्वारा भेजे गए पैसों को डकार रहे है. उन्होंने बताया कि पीएम मोदी द्वारा झारखंड के गांव के विकास के लिए 2254 करोड़ रुपए भेजे गए है. यह पैसा अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों के झारखंड के निर्माण के लिए भेजा गया है. उनका सपना था कि झारखंड के गांवों का विकास हो तभी पूरा झारखंड विकसित हो पाएगा. झारखंड निर्माण के बाद अब तक इतनी बड़ी राशि राज्य के गांवों के विकास के लिए नहीं मिली. केंद्र में कांग्रेस के कार्यकाल में भी उन्होंने झारखंड की बारे में नहीं सोचा. लेकिन पीएम मोदी ने यह पैसा झारखंड के लोगों के लिए भेजा है.
इस पैसे को को लेकर भानु प्रताप शाही ने कहा कि उन्हें डर और आशंका है कि कहीं राज्य में चल रही कट-कमीशन की सरकार और इसमें शामिल मंत्री, बिचौलिया और अधिकारी गांवों के विकास के लिए भेजे गए पैसों पर अपना कट-कमीशन के बारे में सोचा रहे होंगे. कहीं यह लोग गांवों के विकास में अपना नजर तो नहीं गाड़े हुए है. उन्होंने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह को भी घेरा और कहा कि अगर वह भी इसपर कट-कमीशन के बारे में सोच रही है तो फिर गांवों के लोगों का बहुत बुरा हाल होगा. अगर ऐसा है तो भातरीय जनता पार्टी राज्य सरकार के सभी कार्यों पर आंख गड़ाकर बैठी है. कुछ भी हेर फेर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. पीएम मोदी द्वारा भेजे गए पैसे को लेकर एक बार भी सीएम और मंत्री ने नहीं सोचा कि उन्हें धन्यवाद ज्ञापन करें. यह लोग लगातार हर विधानसभा सत्र के दौरान कहते है कि केंद्र सौतेला व्यवहार करता है, केंद्र पैसा नहीं भेजता. लेकिन इन्हें यह नहीं दिखा कि इतनी बड़ी राशि गांवों के विकास के लिए भेजी गई. इसमें हर पंचायत के विकास के लिए करीब 52 लाख रुपये भेजे गए है. इन पैसों का सकारात्मक इस्तेमाल होना चाहिए. कहीं यह कट-कमीशन वाली सरकार पंचायत के पैसों पर भी अपना हिस्सा ना देख रही हो.
इसके अलावा उन्होंने राज्य सरकार को केंद्र के योजनाओं में देरी करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हेमंत जी की सीसी सरकार जानबूझकर केंद्र के योजनाएं धरातल पर लागू नहीं करती. बीते वित्तीय वर्ष में इस सरकार ने 30 हजार करोड़ रुपये सरेंडर कर दिए. इससे यह समझ में आता है कि यह सरकार कितनी निकम्मी है. अगर सरकार यह पैसे खर्च करती तो झारखंड का ही विकास होता. केंद्र से 2 लाख 48 हजार पीएम आवास योजना मोदी जी ने केवल झारखंड को देने का काम किया. लेकिन इस योजना को झारखंड में कछुआ की गति से हेमंत जी चला रहे है. इसके अलावा राज्य सरकार ने जनता को बेवक़ूफ़ बनाने के लिए 8 लाख अबुआ आवास बनाने की योजना लाइ. लेकिन आज तक एक भी अबुआ आवास का निर्माण नहीं हुआ और ना ही उसमें गृह प्रवेश हुआ. यह सरकार पीएम आवास की लिस्ट में अबुआ आवास के लाभार्थियों को घुसा रही है अधिकारियों के माध्यम से.
उन्होंने आगे कहा यही नहीं राज्य सरकार तो नल जल योजना के माध्यम से पानी नहीं पहुंच पा रही है. टंकी लग गई है. लेकिन पानी नहीं है. ऐसा इसलिए क्योंकि यह केंद्र सरकार की योजना है. केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए पैसे इस योजना के यह लोग खा गए है. मोदी जी का भेजा हुआ पैसा मंत्री, बिचौलिया और अधिकारी खा गए है. झारखंड के प्रिमिटिव ट्राइब के लिए भी मोदी जी ने 2050 करोड़ रुपए भेजे है. लेकिन इसे लेकर राज्य सरकार इस पैसे को खर्च करने में संकोच कर रही है. अगर इसमें भी कट-कमीशन के नजर से अगर सरकार देखने का काम करेगी तो भाजपा चुप नहीं बैठेगी और इसके खिलाफ आंदोलन करेगी.
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