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झारखंड में प्रति व्यक्ति होता है 200 ग्राम दुग्ध उत्पादन, यह काफी कम है- बादल पत्रलेख

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में प्रति व्यक्ति 200 ग्राम दुग्ध उत्पादन होता है, जो काफी कम है। हमें केंद्र सरकार का सहयोग चाहिए। बिहार से झारखंड को अलग हुए दो दशक से ज्यादा हो गए हैं, लेकिन आज तक सुधा के तीन डेरी प्लांट का स्वामित्व झारखंड को नहीं मिला है। यह बातें झारखंड के कृषि पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री बादल पत्रलेख ने गुरुवार को विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर श्रीनगर में केंद्रीय मंत्री मत्स्य पालन पशुपालन एवं डेयरी पुरुषोत्तम रुपाला की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कही। यह बैठक शेर ए कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर जम्मू कश्मीर में हुई। जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल मनोज सिन्हा के अलावा  देश के विभिन्न राज्यों के मंत्री भी थे। बादल ने कहा कि बिहार के किसानों का दूध आज भी झारखंड के डेरी प्लांट में आता है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से कहा कि आप दोनों राज्यों के बीच चल रहे इस मामले को सुलझाने का कार्य करें। बादल ने यह भी बताया कि 2014 में हेमंत सोरेन की सरकार में  एनडीडीवी से एमओयू किया था, जो 2024 तक है।

केंद्र भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर दें लक्ष्य
बादल ने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्य तय करें। दुग्ध उत्पादन सहित अन्य योजनाओं के लिए और देश के विभिन्न राज्यों को भी वहां के भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर एक लक्ष्य दें, जिससे हम बेहतर कर सकते हैं। मुख्यमंत्री पशुधन स्कीम के तहत हम 75 प्रतिशत से लेकर 90 फ़ीसदी तक सब्सिडी अपने किसानों को देते हैं। हमारा राज्य  आदिवासी बहुल राज्य है। हम लगातार बेहतर करने का प्रयास कर रहे हैंहमने इस वर्ष दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य 92,00,000 लीटर दूध का रखा है।

सूखा राहत का पैसा मिले तो लाखों पशुपालकों का होगा कल्याण
बादल पत्रलेख ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड की स्थिति बहुत ही खराब है। बैंकों के द्वारा सपोर्ट नहीं किया जाता है। ऐसे में केंद्र सरकार को सहयोग करने की आवश्यकता है। वहीं, उन्होंने केंद्रीय मंत्री के सामने झारखंड सरकार के द्वारा 226 ब्लॉक को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के मामले को भी रखा। उन्होंने कहा कि केंद्र की टीम झारखंड के दौरे पर आई थी, उन्होंने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है, केंद्र सरकार सूखा राहत का  पैसा देती है, तो इससे लाखों पशुपालकों का कल्याण होगा। उन्होंने कहा कि यह विभाग आप से संबंधित नहीं है, लेकिन पशुपालकों को लाभ मिलेगा, इसलिए मेरा निवेदन है कि आप इसे दिलाने में समन्वय स्थापित कर, हमारी मदद करें।

तकनीकी पहलू को किया जाए शिथिल
दूध का रेट तय करने वाली एनडीडीवी के संबंध में मंत्री बादल ने कहा कि उसे मॉनिटर करने की आवश्यकता है। हमारे राज्य में ऐसी गाय हैं, जो 1 से 2 लीटर दूध देती है  बाहर से लाकर किसानों को हम गाय देते हैं तो किसान उसके चारे की व्यवस्था नहीं कर पाते हैं जबकि हम गाय के चारा में भी ज्यादा से ज्यादा सब्सिडी देते हैं। उन्होंने कहा कि दूध की कीमत स्थिर रहें इसके लिए भौगोलिक क्षेत्रफल को देखते हुए तकनीकी पहलू को शिथिल किया जाए, ऐसा करने से किसानों को ज्यादा लाभ होगा।

नहीं है डायग्नोसिस लैब
यहां पशुओं को होने वाली बीमारी की जांच को लेकर बादल पत्रलेख ने कहा कि हमारे यहां डायग्नोसिस लैब नहीं है। केंद्र सरकार के द्वारा इसे दिया जाए। साथ ही बेकन फैक्ट्री को रिवाइव करने के लिए कंसल्टेंसी सपोर्ट दी जाए। बादल ने पशुओं के लिए मॉडर्न 24 * 7 रेफरल अस्पताल खोलने में हर प्रकार के सपोर्ट की मांग की

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