द फॉलोअप डेस्क
झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL नियुक्तियों को रद्द करने वाले सरकारी आदेश के क्रियान्वयन और निष्पादन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने CGL के सफल अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि वे संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि याचिकाकर्ताओं और अन्य प्रभावित कर्मचारियों को याचिका के अंतिम निपटारे तक अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी जा सके। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि नियमित नियुक्ति को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना समाप्त नहीं किया जा सकता। सरल शब्दों में कहें तो कोर्ट के आदेश के बाद विभाग इन कर्मचारियों से काम ले सकेगा।

कर्मचारियों को शपथ पत्र देना होगा
हाईकोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं को शपथ पत्र जमा करने का निर्देश दिया है। इसमें उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि संबंधित आपराधिक मामले में निचली अदालत का अंतिम फैसला उन पर लागू होगा। साथ ही सरकार नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र रहेगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने दलील दी कि अभ्यर्थियों की विधिवत नियुक्ति हुई थी, लेकिन बिना सुनवाई का मौका दिए और उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना अचानक पूरी भर्ती रद्द कर दी गई। अदालत ने कहा कि न्याय के हित और सुविधाजनक संतुलन को देखते हुए फिलहाल राहत याचिकाकर्ताओं के पक्ष में है।

7 सितंबर तक सरकार को जवाब, 15 को अगली सुनवाई
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने तर्क दिया कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और अनियमितताएं हुई थीं। मामले की जांच CID कर रही है और इस संबंध में कुछ गिरफ्तारियां भी हुई हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 7 सितंबर 2026 तक जांच की स्थिति रिपोर्ट के साथ विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं याचिकाकर्ताओं को 14 सितंबर 2026 तक अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर 2026 को दोपहर 12:15 बजे निर्धारित की गई है।