द फॉलोअप डेस्क
28 मई का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत शर्मनाक रहा। मर्यादा और परंपरा की धज्जियां उड़ाई गई। इस दिन पांच महत्वपूर्ण घटनाएं हुई, जिसे महज संयोग नहीं कहा जा सकता। ये बातें झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कही। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि एकजुट होकर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के आदर्शों और संविधान की रक्षा की जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि आखिर यह देश किधर जा रहा है। राजतंत्र, अधिनायकवाद, सामंतवाद या फिर तानशाहवाद… आखिर प्रधानमंत्री, आरएससस और भाजपा इस देश को कहां ले जाना चाहते हैं।

दलित व आदिवासी राष्ट्रपति को रखा गया दूर
प्रधानमंत्री जब संसद भवन की आधारशिला रख रहे थे तब उस समय दलित समुदाय से आने वाले तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को इससे दूर रखा। वहीं, 28 मई को जब इसका उद्घाटन हुआ तो वर्तमान आदिवासी महिला राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दूर रखा गया। इसके अलावा जाट और ओबीसी समाज से आने वाले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को भी कार्यक्रम से दूर रखा गया। सुप्रिया के अनुसार यह महज संयोग नहीं सोची-समझी रणनीति थी। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि आधारशिला और उद्घाटन पट पर सबसे ऊपर प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का नाम लिखा रहे। दूसरी ओर संसद भवन से केवल एक किमी दूर देश के लिए पदक लाने वाले खिलाड़ियों को घसीटा जा रहा था, मारा जा रहा था। जबकि आरोपी भाजपा सांसद बृजभूषण सिंह को प्रधानमंत्री सामने बैठाकर मर्यादा, धर्म-अधर्म और सत्यमेव जयते का पाठ पढ़ा रहे थे। यह भी महज संयोग था।



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