द फॉलोअप डेस्क
करोड़ों रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क पर जहां एक ओर गाड़ियां सरपट दौड़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क के बीचों-बीच खड़े 100 साल पुराने ताड़ के पेड़ बाइक, टेम्पो, अन्य वाहनों और राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
झारखंड-बिहार को जोड़ने वाली यह मुख्य सड़क मिर्जाचौकी, मंडरो, बोआरीजोर होते हुए बाराहाट और पीरपैंती तक जाती है। इस सड़क का चौड़ीकरण कार्य अभी जारी है। लेकिन कई जगहों पर पुराने पेड़ों को सड़क के बीचों-बीच ही छोड़ दिया गया है, जिससे दुर्घटना की संभावनाएं लगातार बनी हुई हैं।
जानकारी के अनुसार, इस सड़क का निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है। पेड़ों के बीच से गुजरते वाहन चालकों को अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय राहगीरों का कहना है कि सड़क पर खड़े ये पेड़ हर दिन किसी न किसी हादसे को न्योता दे सकते हैं। ऐसे में उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इन पेड़ों को जल्द से जल्द हटाया जाए, ताकि दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
राहगीरों का यह भी सवाल है कि अगर किसी की दुर्घटना होती है तो आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? एक ओर राज्य में सड़क नेटवर्क को दुरुस्त करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो रहे है, वहीं दूसरी ओर विभागीय समन्वय की कमी के कारण आम लोगों की जान पर बन आई है। इस संबंध में जब साहेबगंज एसडीओ अमर जॉन से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वे इस विषय में संबंधित विभाग को अवगत कराते हैं और जल्द ही इस समस्या का समाधान निकाला जाएगा।
