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पंचायत चुनाव की आहट के साथ मुख्यमंत्री को याद आई गांव की सरकार - आदित्य साहू

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रांची 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने गांव की सरकार के प्रति मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रेम को दिखावा और राजनीतिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आहट होते ही मुख्यमंत्री सियासी ढोंग करने में जुट गए हैं। 4 वर्षों तक गांव की सरकार के लिए हेमंत सरकार ने एक भी कुछ काम किया हो तो उन्हें बताना चाहिए। अब जब अगले वर्ष चुनाव होने हैं तो केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई राशि का श्रेय लेकर राज्य सरकार झूठी वाहवाही बटोरने में जुटी हुई है। साहू ने कहा कि राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर मुखिया सम्मेलन में मुख्यमंत्री गांव की सरकार को लेकर लंबी चौड़ी बातें करते हैं कि गांव के विकास से ही राज्य का विकास संभव है लेकिन राज्य की जनता यह नहीं भूली है कि यही हेमंत सोरेन की सरकार पिछली दफा पंचायत चुनाव को लगातार कैसे टालती रही।

जनप्रतिनिधि झारखंड सरकार के इन चालों को बखूबी समझ रहे

आज जब केंद्र सरकार द्वारा 4342 पंचायत को 2254 करोड रुपए यानी प्रत्येक पंचायत को लगभग 52 लाख रुपए विकास के लिए दिया गया है तो हेमंत सरकार इसका श्रेय लेने के लिए ऐसा प्रपंच रच रही है। गांव की सरकार के जनप्रतिनिधि झारखंड सरकार के इन चालों को बखूबी समझ रहे हैं। 4 सालों तक हेमंत सरकार ने गांव की सरकार के लिए क्या किया, यह उन्हें बताना चाहिए। आखिर गांव की सरकार का क्या कसूर था। आज पीएम ने चिंता नहीं की होती तो यह जो पैसा आया है वह भी नहीं आ पाता। हेमंत सरकार खर्च फंड का उपयोगिता प्रमाण पत्र तो दे ही नहीं पाती और चली है लंबी चौड़ी बातें करने। झारखंड गठन के बाद ग्रामीण विकास के लिए एकमुश्त इतनी बड़ी राशि कभी भी नहीं मिली। देश के प्रधानमंत्री की दूरदर्शी सोच के कारण ही यह संभव हुआ है।

इस सरकार का इतिहास कट कमीशन का 

यह राशि पंचायतों के माध्यम से गांवों के विकास, अटल बिहारी वाजपेई के सपनों का झारखंड निर्माण करने के लिए भेजा गया है। इसलिए केंद्र द्वारा पंचायत को भेजे गए एक-एक पैसे का सदुपयोग कैसे हो, यह राज्य सरकार सुनिश्चित करे। उन पैसों का उपयोग पंचायत के अंतर्गत आने वाले गरीब, वंचित, शोषित, मजदूरों की भलाई में खर्च हो। मोदी सरकार ने पैसा इसलिए नहीं दिया कि उन पैसों का दुरुपयोग हो, उस पैसे पर भ्रष्टाचारियों की गिद्ध नजर पड़े। यह साफ चेतावनी है कि अगर इस मामले में भ्रष्टाचार करने की थोड़ी भी कोशिश हुई तो गांव-गांव तक भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता इसका विरोध करेंगे और उनके द्वारा उसकी निगरानी की जाएगी। क्योंकि इस सरकार का इतिहास कट कमीशन का रहा है। लेकिन इसमें गलती से भी ऐसा नहीं हो। भाजपा अध्यक्ष ने प्रदेश भर के मुखिया, वार्ड पार्षद, पंचायत समिति सदस्य, प्रमुख, जिला परिषद के सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष से भी आग्रह किया है कि वे अपनी निगरानी और देख रेख में इस राशि को खर्च करवाएं।

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