द फॉलोअप डेस्क
अब लोगों को बंदूक उठाने की आवश्यकता नहीं है। सरकार की योजनाएं उठा-उठा कर ले जाओ। डर भय से कितने दिन जिंदा रहेंगे। मान-सम्मान स्वाभिमान के साथ चलिए। योजना आपके द्वारा पर रखी है। जिस लक्ष्य को पाने के लिए आपने बंदूक उठाई, वह लक्ष्य सरकार की योजना से आप हासिल कर सकते हैं। यह बात शुक्रवार को बूढ़ा पहाड़ पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही। उन्होंने कहा कि झारखंड-छत्तीसगढ़ से जुड़ा बूढ़ा पहाड़ जो कभी नक्सलियों के कब्जे में था वहां हमलोग आज आए हैं। एक लंबे संघर्ष और कार्य योजना का ये परिणाम है कि आज यहां ग्रामीण, सरकारी महकमा के पदाधिकारी व मुख्यमंत्री यहां एकत्रित है। काफी उत्साह भरा माहौल है। कभी यह खूबसूरत वादियां हुआ करती थीं। लेकिन माओवादियों के द्वारा भयावह व डरावना क्षेत्र बनाकर रखा गया था। बताते चलें कि करीब 32 साल से नक्सलियों के कब्जे में रहा ये पहाड़ अब आजाद हो गया है। इस पहाड़ पर कदम रखने वाले हेमंत सोरेन पहले मुख्यमंत्री बने।

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खुशनुमा माहौल की रखी नींव
बूढ़ा पहाड़ को लेकर सीएम ने कहा कि हमने पहले से ही इस क्षेत्र को लक्ष्य में रखा था। उस लक्ष्य के अनुरूप हमलोगों ने काम किया। इसका नतीजा है कि आज यहां एक खूशनुमा माहौल की नींव रखी जा रही है। आप लोगों को सूचना मिला होगा कि बहुत पहले से ही इस जगह पर आना चाहता था। मैं जानता था कि आज नहीं कल मैं यहां जरूर आऊंगा। ये पहाड़, जंगल, नदी मेरे लिए नया नहीं है। कुछ चीजें बिल्कुल योजनाबद्ध तरीके और निर्धारित समय से काम किया जाए तो मुझे लगता है, कोई काम असंभव नहीं है।

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आज हेलीकॉप्टर से आएं हैं, जल्द सड़क मार्ग से आएंगे
सीएम ने कार्यक्रम के दौरान मीडिया कर्मियों से कहा कि आने वाले 6 महीने के बाद फिर वे लोग आएं। आज जो नींव स्थापित किया है उसका बदलता रूप आपको देखने को मिलेगा। जंगह, ग्रामीणों की भाषा को बहुत अच्छे से समझ पाता हूं। आज मुझे बहुत खुशी है कि ग्रामीण इतने बड़ी संख्या में यहां पहुंचे हैं। सीएम ने कहा कि आज वे हेलीकाप्टर से आए हैं, बहुत जल्द सड़क मार्ग से आएंगे।

सन्नाटे का लाभ दोबारा नहीं उठाने दिया जाएगा
सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि खुशी है कि ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर सरकार के साथ खड़ा होने और जुड़ने का काम किया। अब यहां जो योजनाएं लागू की जा रही है, उसकी लगातार मॉनिटरिंग होगी। ताकि जिस सन्नाटे का लोगों ने फायदा उठाया है, वह दोबारा न उठाए। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बाद उनके पुनर्वास के लिए भी कई योजनाएं हैं। साथ ही केंद्र सरकार के संबंध में कहा कि ऐसे क्षेत्रों के विकास के लिए भारत सरकार ने फंड दिया था। मगर जीएसटी वगैरह बंद होने से राज्य को नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि नक्सल प्रभावित जिलों के लिए अलग से फंडिंग केंद्र सरकार को करनी चाहिए।
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