द फॉलोअप डेस्क, रांची:
Congress CLP Leader Pradeep Yadav on SIR : कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव(Pradeep Yadav) ने मतदाता सूची में गड़बड़ी और SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्होंने दो पत्र लिखे हैं। पहला पत्र झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को और दूसरा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह(Amit Shah) को भेजा है।
प्रदीप यादव ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के उस बयान को लेकर कहा कि अगर किसी का नाम मतदाता सूची से काटा गया है तो कोई भी राजनीतिक दल ऐसे 10 नाम सामने लाए, चुनाव आयोग उनकी जांच कराएगा। उन्होंने कहा कि वे इस चुनौती को स्वीकार करते हैं और अपनी ओर से 19 ऐसे लोगों के नाम बूथवार EPIC नंबर के साथ उपलब्ध कराए हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से काटे जाने का मामला सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो जीवित हैं, लेकिन SIR प्रक्रिया में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है।

फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर चुनाव आयोग मौन
प्रदीप यादव ने कहा कि अभी अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित नहीं हुई है। ऐसे में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था। भले ही अब तक किसी का नाम नहीं कटा हो, लेकिन झारखंड के एक करोड़ सात लाख मतदाताओं के मन में यह आशंका है कि कहीं उनका नाम भी मतदाता सूची से न हट जाए। प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा के लिए चुनाव आयोग की अलग टीम काम कर रही है। उन्होंने गोड्डा में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग को लेकर दो FIR दर्ज होने का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा अपने विरोधी मतदाताओं के नाम कटवाने की कोशिश कर रही है, लेकिन चुनाव आयोग इस पर चुप्पी साधे हुए है।
उन्होंने फॉर्म-6 के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह फॉर्म नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए है, जबकि SIR में चुनाव आयोग की गलती से जिन मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, उन्हें शामिल करने के लिए अलग प्रावधान मौजूद है। इसके बावजूद चुनाव आयोग उस प्रावधान का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि गलती मतदाताओं की नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की है।

अमित शाह को राहुल गांधी की चुनौती स्वीकार करने की नसीहत
प्रदीप यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा लोकतंत्र बचाने का ढोंग कर रही है, जबकि उसके शासनकाल में लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता प्रभावित हुई है। उन्होंने ED, CBI और RBI जैसी संस्थाओं को भाजपा के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया और कहा कि अब वोट देने के अधिकार पर भी हमला किया जा रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि SIR को वोट काटने के औजार के रूप में क्यों इस्तेमाल किया जा रहा है? सुप्रीम कोर्ट की ओर से चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने के प्रावधान के बावजूद केंद्र सरकार ने कानून में बदलाव क्यों किया? उन्होंने चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। प्रदीप यादव ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गए हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल और हरियाणा के चुनावों का जिक्र करते हुए भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए।