द फॉलोअप डेस्क
राष्ट्रपति आदिवासी हैं। इसलिए उनको संसद भवन के उद्घाटन कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया गया। ऐसे में उद्घाटन कार्यक्रम का बहिष्कार किया जाएगा। ये बातें झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि यह देश की बड़ी विडंबना और एक त्रासदी जैसी ही है कि अंग्रेजों के सामने कई बार घुटने टेकने वाले वीर सावरकर, जिन्होंने माफी मांगी, समझौता किया, उनके जन्मदिन को नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए चुना गया। दूसरी ओर देश के संसदीय व लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रमुख राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रपति को उदघाटन का मुख्य अतिथि बनाना तो दूर उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया। यह संविधान का अपमान है। देश की 140 करोड़ जनता का अपमान है। इसलिए झामुमो देश के नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह में नहीं जाएगा।

नई परंपरा की शुरुआत कर रही है भाजपा

सुप्रीम कोर्ट में की गई याचिका दायर
संसद के नए भवन उद्घाटन कायक्रम का देश की 40 पार्टियों में से 20 ने बहिष्कार का एलान किया है। जिसमें कांग्रेस भी शामिल है। दूसरी ओर भाजपा समेत 17 पार्टियों ने सरकार के न्योते को स्वीकार कर लिया है। इस बीच उद्घाटन का मामला अब SC पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए लोकसभा सचिवालय द्वारा राष्ट्रपति को उद्घाटन के लिए आमंत्रित नहीं करने को संविधान का उल्लंघन बताया गया है। विपक्ष का कहना है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को दरकिनार कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उद्घाटन कराने का न केवल गंभीर अपमान है, बल्कि यह लोकतंत्र पर भी सीधा हमला है। विपक्ष का कहना है कि इस सरकार में संसद से लोकतंत्र की आत्मा को निकाल दिया गया है। ऐसे में नए भवन का कोई मतलब नहीं है।
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