पचम्बा/गिरिडीह:
गिरिडीह में गाड़ी फाइनेंस कराने के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप, राधा स्वामी संगठन पर लगा है। दावा है कि कंपनी के संचालक फरार हैं। बीते मंगलवार को पचम्बा थानाक्षेत्र के बोडो स्थित संगठन के कार्यालय में बड़ी संख्या में भुक्तभोगी पहुंचे और हंगामा किया। यहां आकर ठगी का शिकार हुए लोगों को पता चला कि संगठन से जुड़े अनीता सिन्हा, दीपक शर्मा और मुकेश सिन्हा कार्यालय बंद करके फरार हो चुके हैं। लोगों को यहां केवल एक नोटिस चस्पा मिला जिसमें कार्यालय बंद होने की सूचना दी गई है।

कार्यालय बंद होने पर फूटा लोगों का गुस्सा
कार्यालय बंद होने का नोटिस देखते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इन लोगों ने गाड़ी फाइनेंस कराने के नाम पर संस्था में लाखों रुपये जमा कराए थे। पीड़ितों का कहना है कि संस्था के संचालकों ने नई गाड़ी दिलाने और किस्त जमा करने का झांसा देकर उन्हें अपनी जाल में फंसाया था। इनका कहना है कि शुरुआत में संस्था ने कुछ समय तक किस्त जमा किया, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया। पीड़ितों ने सवाल किया तो संचालकों की ओर से लगातार टालमटोल किया जाता रहा।

2 साल से नहीं हुआ EMI का नियमित भुगतान
गौरतलब है कि कई लोगों ने संस्थान के कहने पर अपनी गाड़ियां फाइनेंस कराईं। हालांकि, करीब 2 साल गुजर जाने के बाद भी ईएमआई का भुगतान नियमित रूप से नहीं किया गया। अब जबकि संचालक भाग गए हैं, लोगों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

संचालकों में शामिल अनीता सिन्हा का वीडियो
इस बीच संचालको में एक अनीता सिन्हा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। अनीता सिन्हा कह रही हैं कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का आवास और कार्यालय बंद है। वह खुद भी उनसे संपर्क नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने कहा कि जब संगठन के शीर्ष पदाधिकारी नहीं मिल रहे हैं तो आम लोगों की गाड़ियों का भुगतान कैसे होगा।
अनीता सिन्हा के बयान से भुक्तभोगी नाराज
अनीता सिन्हा के बयान से भुक्तभोगी और नाराज हो गए। इनका कहना है कि हमें महीनों तक संस्था की ओर से भरोसा दिलाया जाता रहा कि सभी किस्तें समय पर जमा की जाएंगी, लेकिन अब जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। पीड़ितों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच, आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और उनके लिए न्याय सुनिश्चित करने की मांग की है।
पचम्बा थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि पुलिस इस केस में लिखित शिकायत का इंतजार कर रही है। आवेदन मिलते ही प्राथमिकी दर्ज करके कार्रवाई की जायेगी।