द फॉलोअप, रांची
पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के संभावित परिणाम को देखते ही राज्य के वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण किशोर उबल पड़े हैं। उन्होंने झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के राजू को एक कड़ा पत्र लिखा है। उसमें उन्होंने लिखा है-झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के एक आँख में सूरमा और दूसरे में काजल चरितार्थ हो गया है। कार्यकर्ता जानना चाहते हैं कि बड़कागांव क्षेत्र के कांग्रेसी स्तंभ पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव का क्या दोष था जिन्हें तीन वर्षों के लिए पार्टी से निष्काषित कर दिया गया। दूसरी ओर रमा खलको, जिन्होंने आपको और कांग्रेस को सार्वजनिक रूप से कोसा उसे पार्टी ने चुनाव प्रबंध समिति का सदस्य बना दिया गया।

राधाकृष्ण किशोर ने आगे लिखा है-सर, 81 सीट वाले झारखण्ड विधानसभा के लिए झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के कुल 314 सदस्यों की समिति कितना कारगर होगी ये समय बताएगा। देश में हुए चुनाव परिणाम से भी झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमिटी को सीखने की आवश्यकता है। जंबो जेट समिति की जगह यदि प्रदेश नेतृत्व के बारे में पार्टी कोई फैसला ले तो ही कांग्रेस संगठन के मजबूती की कल्पना की जा सकती है।
वैसे राधाकृष्ण किशोर के पत्र के बाद कई सवाल खड़े होने लगे हैं। योगेंद्र साव को पार्टी ने 20 मार्च को निष्कासित किया था। इतने दिनों तक वह चुप क्यों रहे। इतना ही नहीं प्रदेश कांग्रेस कमेटी की घोषणा 3 मई को की गयी,वह विधानसभा चुनावों के स्पष्ट रुझान आने तक चुप क्यों रहे। हालांकि यह होना ही था। इसका अंदेशा राजनीति के हर समझदार को पहले से थी। असम और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को करारी हार मिलने के बाद पार्टी के भीतर से खदबदाहट सामने आएगी। वह अब आने लगी।
