
हाथ मिलाता था, गले लगता था तो ट्रांसमिशन सा होता था
भारत जोड़ो यात्रा के संबंध में राहुल ने कहा कि 4 महीने कन्याकुमारी से श्रीनगर तक हमने यात्रा की। लाखों लोग मेरे साथ चले। बारिश, गर्मी और बर्फ में हम सब एकसाथ चले। बहुत कुछ सीखने को मिला। आपने देखा होगा कि पंजाब में एक मैकेनिक आकर मुझसे मिला। मैंने उसके हाथ पकड़े और सालों की उसकी तपस्या, उसका दर्द और दुख मैंने पहचान लिया। लाखों किसानों के साथ जैसे ही हाथ मिलाता था, गले लगता था एक ट्रांसमिशन सा हो जाता था। यात्रा के शुरुआत में क्या करते हो, कितने बच्चे हैं, क्या मुश्किलें हैं यह पूछना पड़ता था। मगर एक-डेढ़ महीना चलने के बाद बोलने की जरूरत नहीं पड़ती थी। जैसे ही हाथ पकड़ा, गले लगे उनका दर्द एक सेकंड में समझ आ जाता था।
पीएम ने 15-20, हमने लाखों लोगों के साथ फहराया तिरंगा
पीएम नरेंद्र मोदी जी ने बीजेपी के 15-20 लोगों के साथ लाल चौक में झंडा फहराया था। वहीं, भारत जोड़ो यात्रा ने लाखों लोगों के साथ झंडा फहराया। इस दौरान एक कश्मीरी आया और कहा कि मैं आपके साथ तिरंगा लेकर चल रहा हूं। आपने हमारे दिल में जो भरोसा दिया है। राहुल ने कहा कि हमारे साथ भारत यात्रा में लाखों लोग जुड़े ये काम राहुल गांधी ने नहीं किया, हमारे कार्यकर्ता ने किया।

कमजोर को मारना, मजबूत के आगे झुकना, क्या देशभक्ति है
राहुल गांधी ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक नेता ने इंटरव्यू में कहा कि चीन की इकॉनमी हमसे बड़ी है। हम उनसे कैसे लड़ सकते हैं। जब अंग्रेजों से लड़ हम रहे थे, तो हमारी इकॉनमी उनसे बड़ी थी क्या। शक्तिमान से नहीं लड़ने को कायरता कहा जाता है। ये सावरकर की सोच है कि जो आपसे तगड़े हैं तो उसके सामने सिर झुका लो। अब सोचे कि एक मंत्री बोल रहा है कि चीन की इकॉनमी हमसे बड़ी है तो लड़ नहीं सकते हैं। क्या इसे देशभक्ति कहते हैं। ये कौन सी देशभक्ति है कि जो कमजोर है, उसे मारो और जो मजबूत है उसके सामने झुक जाओ।

अडाणी की रक्षा क्यों कर रही भाजपा-संघ
राहुल गांधी ने कहा कि मैंने संसद में एक उद्योगपति के खिलाफ मोर्चा खोला। फोटो दिखाई कि मोदीजी अडाणी के साथ प्लेन में बैठे हैं। मैंने सवाल किया कि आखिर क्या रिश्ता है। इसके बाद पूरी सरकार, सभी मंत्री अडाणी जी की रक्षा करने में लग गए। अडाणी पर हमला करने वाला देश द्रोही और अडाणी देशभक्त बन गए। भाजपा और संघ के द्वारा उस व्यक्ति की रक्षा की जार ही है। राहुल ने आगे कहा कि सवाल है कि रक्षा क्यों कर रहे हैं। ये जो शेल कंपनियां हैं, हजारों करोड़ रुपया हिंदुस्तान भेज रही हैं, ये किसकी है। किसका पैसा है। जांच क्यों नहीं हो रही है। जेपीसी क्यों नहीं बन रही है।
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