द फॉलोअप डेस्क
बाबा बैजनाथ की पावन भूमि देवघर नगर निगम के मेयर पद का चुनाव शतरंज की चाल की तरह पल पल प्रभाव डाल रहा है। बागी नागेंद्र नाथ उर्फ बाबा बलियासे के बिद्रोही तेवर से जहां भाजपा समर्थित रीता चौरसिया हांफ रही है वहीं सुरेश झा झामुमो समर्थित रवि राउत की भी सांसे फूल रही है। अब तक झामुमो के किसी बड़े नेता का रवि राउत के पक्ष में प्रभावी ढंग से नहीं उतरने के कारण उनका ब्लड प्रेशर भी बढ़ रहा है। कांग्रेस की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। कांग्रेस ने यहां डॉ गौरव की जगह रवि केशरी का समर्थन तो कर दिया है, लेकिन केशरी खुद कांग्रेस के बैनर, पोस्टर और इसके नेताओं का उपयोग अपने चुनाव प्रचार में नहीं ले रहे हैं। इसके अलग अलग कारण और कारक हैं। इन सबके बीच कांग्रेस के बागी डॉ गौरव ताल ठोक रहे हैं। वह अकेले झामुमो, कांग्रेस और भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को चुनौती देते दिख रहे हैं।

कौन कहां और कैसे फंस रहा
शुरुआत सत्ताधारी दल झामुमो और कांग्रेस से करते हैं। चुनाव की घोषणा से पहले सुरेश झा झामुमो के भावी प्रत्याशी के रूप में पड़ोसे जा रहे थे। सुरेश झा मेयर पद को केंद्र में रख कर, उसी अनुरूप देवघर में सामाजिक कार्य में भी जुटे रहे थे। लेकिन अंतिम समय में मंत्री हफीजुल हसन और कुछ अन्य नेताओं की पैरवी पर रवि राउत झामुमो समर्थित उम्मीदवार घोषित कर दिए गए। परिणाम हुआ कि सुरेश झा अपने ही दल के प्रत्याशी के विरुद्ध और आक्रामकता के साथ मैदान में चिग्घाड़ रहे हैं। नीम पर करैला यह चढ़ता हुआ दिख रहा है कि अब तक रवि राउत के पक्ष में झामुमो का कोई बड़ा नेता, मसलन हफीजुल हसन, चून्ना सिंह, सुरेश पासवान सरीखे नेता प्रभावी प्रचार में नहीं दिख रहे हैं। अब कांग्रेस की बात भी जरूरी है। डॉ गौरव सिंह कांग्रेस के समर्थन की आस में अपना नामांकन किया था। उनके नामांकन में कांग्रेस के वर्तमान, पूर्व जिलाध्यक्षों के अलावा उस क्षेत्र के अन्य बड़े नेता भी शामिल हुए। लेकिन गौरव सिंह के नामांकन के बाद वहां कांग्रेस ने रवि केशरी के समर्थन की घोषणा कर दी। रवि केशरी के केशरवानी समाज का निगम क्षेत्र में 10-12 हजार वोट बैंक भी है। लेकिन कांग्रेस से केशरवानी समाज की क्षेत्रीय नाराजगी की वजह से वह फंसे हुए बताए जा रहे हैं। यही कारण है कि अब तक वह अपने प्रचार में कांग्रेस पार्टी की सहायता कम लेते दिख रहे हैं।

भाजपा समर्थित रीता चौरसिया की स्थिति कुछ अलग है। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहु और प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी देवघर आकर रीता चौरसिया के पक्ष में मतदाताओं को एकजुट करने की पूरी कोशिश की है। रीता चौरसिया वहां आदित्य साहु की पसंद भी बतायी जा रही है। लेकिन पंडा समाज से आनेवाले बाबा बलियासे को भाजपा का समर्थन नहीं मिलने से वह खुल कर पैसे के लेन-देन का आरोप लगा रहे हैं। यहां पंडा समाज से आने वाले दो प्रत्याशियों सुरेश झा और बाबा बलियासे के कारण इस समाज का वोट बैंक बंटता हुआ दिख रहा है। इन सबों के बीच डॉ गौरव सिंह अपनी स्थिति को मजबूत करने में लगे हैं। इसके पीछे उनका स्वजातीय मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है। साथ ही पिछड़े वर्ग से आने वाले तीन प्रमुख प्रत्याशियों के वोट बैंकों के बंटवारे से किसी की मजबूती स्पष्ट नहीं हो रही है।
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