द फॉलोअप डेस्क
टाटानगर स्टेशन पर यात्री ट्रेनों की लेटलतीफी के मुद्दे को लेकर आज विधायक सरयू राय ने धरना दिया. इस दौरान शहर के कई सामाजिक संगठन और व्यापारियों ने सारी राय के इस धरने का समर्थन दिया. धरने का दौरान प्रशासन के ओर से जीआरपीएफ और आरपीएफ बलों की तैनाती की गई थी. इस दौरान सरयू राय ने कहा कि अगर रेलवे ट्रेनों को समय पर नहीं चलाती है तो मजबूर होकर जनता को मालगाड़ी रोकनी पड़ेगी. यह लड़ाई बहुत जल्द 21 सदस्यों की समिति बनाकर लड़ी जाएगी. जरूरत पड़ी तो दिल्ली जाकर रेलमंत्री और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन से मुलाकात करेंगे. उनसे पूछेंगे कि आप हमारे सांसद को क्या आश्वाशन दे देने हैं और क्या आपने डीआरएम को रात में फ़ोन किया. उन्होंने आगे कहा कि धरना देने की घोषणा उन्होंने अकेले की थी. लेकिन कई संगठनों ने उनके इस धरने का समर्थन दिया. क्योंकि आम आदमी से जुड़ा हुआ यह मुद्दा है. अब से रेलवे का यह मुद्दा सामूहिक प्रयास से हल किया जाएगा. उसमें सभी तबके के लोग होंगे. हमलोग मिल कर लड़ेंगे। सभी राजनीतिक दलों को भी हमने पत्र भेजा था कि इसमें शामिल हो. यह जनता का मामला है. हमलोग आगे इसका दायरा बढ़ाएंगे. दिल्ली भी जायेंगे. रेलवे बोर्ड के चैयरमैन और रेलमंत्री से भी बात करेंगे. आपस में आपकी सूचनाओं का लेनदेन चल रहा है, तो सभी को सभी की जानकारी है. किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
सरयू राय ने कहा कि टाटानगर आने-जाने वाली जितनी भी यात्री ट्रेनें हैं, उन्हें समय से चलाया जाए. ये रोजाना चार-पांच घंटे विलंब से पहुंच रही हैं. यह सिलसिला बीते तीन-साढ़े तीन साल से चल रहा है. लोग परेशान हो रहे हैं. पहले हमलोगों ने सोचा था कि इसका समाधान दो-चार दिनों में हो जाएगा लेकिन ज्यों-ज्यों दवा की, मर्ज बढ़ता गया के तर्ज पर ट्रेनों की लेटलतीफी गंभीर होती चली गई. सरयू राय ने कहा कि जब उन्होंने धरना का एलान किया, तब रोज कोई न कोई रेलवे अधिकारी मिलने आते थे. सांसद से उनकी बात हुई. आप लोग जो काम कर रहे हैं, उसमें 3 से 5 साल लगेंगे. क्या हम लोग इतनी लंबी अवधि तक इंतजार करें? यह संभव नहीं. हमलोग इसमें सुधार चाहते हैं. सरयू राय ने आगे कहा कि कई व्यापारियों ने उन्हें बताया कि एक बार जब उनका माल ट्रेन में बुक हो जाता है तो यह रेलवे की जिम्मेदारी है कि वह उसे कैसे चलाए. अगर दो-चार घंटे की देरी भी हो जाती है तो व्यापारी को उससे बहुत दिक्कत नहीं है. उन्होंने डीआरएम से कहा कि अगर मालगाड़ियां थोड़ा विलंब से भी चलेंगी तो फैक्ट्री को बहुत नुकसान नहीं होगा लेकिन अगर यात्री ट्रेन समय से चली तो जनता को बहुत सुविधा हो जाएगी. लेकिन, ये रेल प्रशासन मानने को तैयार नहीं हैं. सरयू राय ने कहा कि चक्रधरपुर रेल मंडल में जो काम शुरु होने जा रहा है, वह अन्य रेल मंडलों में बहुत पहले शुरु होकर खत्म हो चुका है. इसका अर्थ यह निकला कि चक्रधरपुर रेल मंडल को उपेक्षित छोड़ दिया गया. जब जनता आवाज उठा रही है, तब इन्हें परेशानी महसूस हो रही है. अगर रेल प्रशासन समय पर पैसेंजर ट्रेनों को नहीं पहुंचा रहा है, तो इसका अर्थ यह हुआ कि आपकी नीयत में ही खोट है. इसका अर्थ यह भी हुआ कि सरकार को राजस्व मिले या ना मिले, रेल मंडल में कतिपय ऐसे अफसर हैं, जिन्हें अलग से राजस्व की प्राप्ति हो जाती है.
सरयू राय ने कहा कि तीन रोज पहले डीआरएम से बातचीत में उन्होंने कहा था कि पांच साल में कितनी नई यात्री ट्रेनें शुरु हुई हैं, उसकी सूची बना कर दे दें. हमारी जानकारी के अनुसार, बीते पांच वर्षों में वंदे भारत को छोड़ कर कोई नई ट्रेन शुरु नहीं हुई. आज सीनियर डीसीएम ने जो हमें कागज दिया, उसे पढ़ कर हंसी आती है. इतना ही नहीं, जो पुरानी गाड़ियां हैं, जो कोविड में बंद हो गई थीं, उन्हीं ट्रेनों को चलाया गया और रेलवे कह रहा है कि ये नई ट्रेनें हैं. टाटा से बादामपहाड़ के बीच दो-तीन ट्रेनें हैं. ये पहले से चल रही थीं. रांची-हाबड़ा के बीच बहुत पहले से ट्रेन चल रही है. कोविड में बंद थी. उसे भी नई ट्रेन में शुमार कर दिया गया है. जो ट्रेनें पांच साल पहले समय से चल रही थीं, आज वहीं ट्रेनें अगर समय से नहीं चल रही हैं, तो इसका अर्थ यही हुआ कि मालगाड़ियां बढ़ी हैं और आप मालगाड़ियों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं. एक गाड़ी के विलंब होने का मतलब यह हुआ कि ट्रेन में पैंट्रीकार नहीं है, बच्चे हैं, पूरा परिवार है, गाड़ी बियाबान में खड़ी कर देते हैं. उनकी तकलीफ का अंदाजा रेल प्रशासन को नहीं है. मजदूरों की मजदूरी खत्म हो गई विलंब से ट्रेन पहुंचने के कारण. उसे ड्यूटी ही नहीं मिलती है क्योंकि वह ऑन टाइम नहीं पहुंच रहा है. चाकुलिया, बहड़ागोड़ा से मजदूर अब टाटा नहीं आ रहे हैं. समाज का कोई तबका ऐसा नहीं, जिनके लोग लेटलतीफी के शिकार ट्रेन से प्रभावित न हुए हों. सरयू राय ने कहा कि यात्री ट्रेनों का लगातार लेट होना कहीं से भी स्वीकार्य नहीं है. हम सीनियर डीसीएम और एरिया मैनेजर की बात से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं. जो बातें उन्होंने कही है, उसका विश्लेषण हमारे यहां के जागरुक लोगों ने किया है. हमारी एक ही मांग है और उसे पूरा करने के लिए उन्हें बड़ा दिल करना होगा. जनता के साथ संवेदना रखनी होगी. अगर आप सिर्फ रेलवे बोर्ड के फरमान को ही मानेंगे तो जनता के साथ न्याय नहीं हो पाएगा. सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने स्वीकार किया कि ट्रेन विलंब से चल रही हैं, पर इसके समाधान के लिए प्रयास जारी है. उन्होंने सरयू राय को इस संबंध में एक पत्र भी दिया.
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