पश्चिमी सिंहभूम
पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में आईईडी विस्फोट में गंभीर रूप से घायल हुए दंतैल हाथी ने गुरुवार दोपहर करीब 2:30 बजे इलाज के क्रम में दम तोड़ दिया। करीब दस दिनों तक चले इलाज और निगरानी के बावजूद उसकी जान नहीं बचायी जा सकी। उक्त घायल हाथी का उपचार सारंडा के सासंगदा-लेबरागढ़ा नाला के समीप वन विभाग की निगरानी में किया जा रहा था। यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित और अत्यंत संवेदनशील होने के कारण हाथी को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करना संभव नहीं हो पाया। वन विभाग की टीम और मनोहरपुर के पशु चिकित्सक लगातार मौके पर कैंप कर उसका इलाज कर रहे थे।
हर दिन की जा रही थी विशेष देखभाल
हाथी की हालत को देखते हुए वन विभाग द्वारा विशेष इंतजाम किया गया था। प्रतिदिन एक से डेढ़ क्विंटल सब्जियां खिलाई जा रही थीं। इसके अलावा, नियमित रूप से दवाइयां और इंजेक्शन दिए जा रहे थे। चिकित्सकों की टीम लगातार निगरानी में लगी हुई थी। इसके बावजूद, हाथी की स्थिति में सुधार नहीं हो सका और वह धीरे-धीरे कमजोर होता चला गया। फिर उसकी हालत बिगड़ती गई और बचाव के सभी प्रयास नाकाम साबित हुए। वन विभाग के अनुसार, शुरुआती दिनों के बाद से ही हाथी की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी। विस्फोट में आई गंभीर चोटों के कारण उसके ठीक होने की संभावना कम होती जा रही थी।

इलाज के प्रयासों के बावजूद हाथी की मौत
वहीं, इलाके की सुरक्षा स्थिति के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए कहीं और ले जाना संभव नहीं हो पाया, जिससे उपचार सीमित संसाधनों में ही करना पड़ा। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मृत हाथी का पोस्टमार्टम शुक्रवार को कराया जाएगा, जिससे मौत के कारणों की औपचारिक पुष्टि की जा सकेगी। दूसरी ओर, घटना के बाद आसपास के ग्रामीणों ने भी हाथी को बचाने के प्रयासों में सहयोग किया। लगातार निगरानी और मदद के बावजूद अंततः हाथी को नहीं बचाया जा सका।
पहले भी जा चुकी हैं कई जानें
सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा बिछाए गये आईईडी वन्यजीवों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं। अब तक इस तरह की घटनाओं में पांच हाथियों की मौत हो चुकी है। वहीं, दंतैल हाथी की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक की लहर है। यह घटना एक बार फिर जंगल क्षेत्रों में आईईडी के खतरे और वन्यजीवों पर उसके गंभीर प्रभाव को उजागर करती है।