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हड़ताल से 28 लोगों की मौत मामले में राज्य सरकार और RIMS प्रबंधन को जवाब दाखिल करने का मिला समय

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द फॉलोअप डेस्क
रिम्स में करीब तीन साल पहले जूनियर डॉक्टरों व नर्स ने हड़ताल कर दिया था। जिसके कारण 28 लोगों की जान गई थी।  गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट में इसपर सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई। इस मामले में राज्य सरकार और रिम्स प्रबंधन ने जवाब दाखिल करने के लिए अदालत से और समय देने का अनुरोध किया। जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।


आज आंशिक सुनवाई हुई
बता दें कि इन मौतों की जांच के लिए कमेटी गठित करने एवं इस घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग को लेकर झारखंड छात्र संघ की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इस पर आज आंशिक सुनवाई हुई।मामले में राज्य सरकार एवं रिम्स प्रबंधन की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया जा सका, जिस पर इनकी ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की गई। कोर्ट ने इन्हें जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान करते हुए अगली तिथि निर्धारित की।


मरीज की गलत ट्रीटमेंट से मौत पर हुआ था बवाल

1 जून 2018 को एक मरीज की मृत्यु गलत ट्रीटमेंट की वजह से हो गया था। जिसके बाद मृतक के परिजनों ने प्रोटेस्ट किया था। इसको लेकर रिम्स के जूनियर डॉक्टर और मृतक के परिजनों के बीच झड़प हो गई थी। इस झड़प के बाद रिम्स में 2 जून 2018 से जूनियर डॉक्टरों एवं नर्सों ने हड़ताल कर दिया। जिसकी वजह से रिम्स में संपूर्ण चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी। करीब 35 मरीजों का ऑपरेशन टला, 600 से ज्यादा मरीज बगैर इलाज के बैरंग लौटे। वहीं, इलाज के अभाव में 28 मरीजों की भी मौत हुई थी।

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