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गढ़वा में आंधी-तूफान और वज्रपात का कहर, घर ढहे, पेड़ उखड़े; 5 की मौत

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गढ़वा
गढ़वा जिले में आंधी-तूफान और वज्रपात ने भारी तबाही मचाई है. पिछले दो दिनों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आज वज्रपात की घटना में दो लोगों की मौत और दो लोग घायल हो गए. कई स्थानों पर घर ढह गए और विशालकाय पेड़ उखड़कर गिर गए. रंका में लगभग 400 वर्ष पुराना अशोक का पेड़ भी धराशायी हो गया.

आंधी-तूफ़ान ने मचाई तबाही
गढ़वा जिले में आंधी-तूफान ने कई इलाकों में तबाही मचाई है. सबसे पहले गढ़वा सदर थाना क्षेत्र के जुटी गांव में वज्रपात की घटना में एक बच्ची की मौत हो गई और दो लोग घायल हो गए. अचानक मौसम बदलने के बाद तेज गरज और बारिश के बीच वज्रपात हुआ. बताया जा रहा है कि हादसे के समय लोग आम चुनने गए थे. बिजली गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई. 12 वर्षीय समृणा की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. घायलों को तत्काल गढ़वा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है. घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और पुलिस मौके पर पहुंचे. वहीं शहर के टंडवा मोड़ के पास गाय का दूध दुह रहे एक व्यक्ति पर पेड़ गिर गया, जिससे उसकी दबकर मौत हो गई. इस हादसे में दो पशुओं की भी मौत हो गई.

12 वर्षीय बच्चे की भी हुई मौत
दूसरी घटना बिसुनपुरा थाना क्षेत्र की है, जहां दोपहर आए तेज चक्रवाती तूफान, मूसलाधार बारिश और वज्रपात ने सारो गांव में भारी तबाही मचा दी. अचानक बदले मौसम ने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया. तेज गर्जना और आंधी के बीच हुई वज्रपात की घटना में मुड़ाहरा टोला निवासी जयराम बियार के 12 वर्षीय पुत्र आदित्य बियार अपने घर में सो रहा था. इसी दौरान वज्रपात से मिट्टी का घर भरभरा कर गिर गया, जिससे बच्चा मलबे में दब गया और उसकी दर्दनाक मौत हो गई.
कई गांवों में तबाही, घर ढहे और पेड़ उखड़े
इसके अलावा आधा दर्जन से अधिक विशाल महुआ और आम के पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गए. कई घरों के खपरैल और शीट भी उड़ गए. घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई. परिजनों की चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मलबा हटाकर बच्चे को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. मासूम की मौत से परिवार में कोहराम मच गया और गांव का माहौल गमगीन हो गया. वहीं तीसरी घटना रंका थाना क्षेत्र की है, जहां तीन सौ से अधिक वर्ष पुराने शमी और अशोक के पेड़ मंदिर के पास तेज आंधी-तूफान में धराशायी हो गए. बताया जाता है कि ये पेड़ राजा बहादुर गोविंद नारायण सिंह के समय मंदिर निर्माण के दौरान लगाए गए थे. सुबह के समय लोग मंदिर में दर्शन के बाद इन पेड़ों के नीचे माथा टेकते थे. पेड़ गिरने के बाद लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई 

 

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