रांची:
झारखंड की आदिवासी बेटियों को टाटा स्टील (Tata Steel) ने बड़ा तोहफा दिया है। राज्य के चार जिले खूंटी (Khuti), पश्चिमी सिंहभूम (West Singhbhum), सरायकेला-खरसावां (Seraikela-Kharsawan) और सिमडेगा (simdega) जिले की 1984 आदिवासी बेटियां स्वावलंबी बनेंगी। इनके भविष्य को नया रूप देने का भार टाटा समूह की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Tata Electronics Limited, a Tata group company) ने उठाया है। कंपनी ने आदिवासी बेटियां का चयन तमिलनाडु के होसूर (Hosur in Tamil Nadu) स्थित टाटा समूह की कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने किया है। मंगलवार यानि आज हटिया स्टेशन (Hatia Station) से विशेष ट्रेन द्वारा इन्हें होसूर भेजा जायेगा। इन्हें केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा (Union Minister Arjun Munda) हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना करेंगे।

12वीं पास लड़कियों को किया गया चयन
मिली जानकारी के मुताबिक लड़कियां कंपनी में एक साल काम करने के बाद प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से BSC की डिग्री हासिल कर सकेंगी। आर्ट्स और कॉमर्स पढ़नेवाली लड़कियों के लिए ब्रिज कोर्स के जरिये बीएससी डिग्री हासिल करने की व्यवस्था होगी। कंपनी कर्मचारियों के रहने के लिए आवासीय सुविधा भी देगी। कंपनी कौशल विकास के तहत योग और स्पोकेन इंग्लिश का कोर्स करायेगी। बता दें कि कंपनी ने 12वीं पास लड़कियां का चयन किया है। इनको एंट्री लेवल ऑपरेटर के तौर पर नियुक्ति होगी।

पीएफ, ग्रेच्युटी, इएसआइसी की मिलेगी सुविधा
मेगा भर्ती अभियान की जानकारी देते हुए केंद्रीय आदिवासी मामलों के संयुक्त सचिव नवलजीत कपूर ने कहा कि टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड कंपनी की ओर से राज्य की 4000 आदिवासी लड़कियों के चयन का लक्ष्य तय किया गया है। जल्दी ही अन्य जिलों में भी भर्ती कैंप लगाया जायेगा। इन लड़कियों के लिए होसूर में कंपनी, रहने, खाने और परिवहन की व्यवस्था करेगी। वहीं उन्होंने बताया कि होसूर रवाना हो रही लड़कियों ट्रेन में खाने का इंतजाम भी किया गया है। इसके लिए कंपनी का प्रति लड़की तीन हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए कहा कि कर्मचारियों को सभी सुविधाएं जैसे पीएफ, ग्रेच्युटी, इएसआइसी की सुविधा मिलेगी। कंपनी की ओर से कर्मचारी और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य सुविधा दी जायेगी।