द फॉलोअप डेस्क
कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप के ध्यानाकर्षण के जवाब में राज्य सरकार ने सदन को आश्वस्त किया है कि गलत ढंग से एचईसी के विस्थापित रैयतों की जमीन की खरीद बिक्री में शामिल अधिकारी दंडित होंगे। विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ ने सदन और विधायक को आश्वस्त किया कि तीन महीने के भीतर गलत ढंग से हुई जमीन की खरीद बिक्री के बारे में जांच कर रिपोर्ट की मांग की गयी है। रिपोर्ट आते ही दोषी बख्शे नहीं जाएंगे। हालांकि राजेश कच्छप का बार बार कहना था कि एनआईसी ने दिलचस्प रूप से खरीद बिक्री के बाद रसीद भी निर्गत कर दिया है। इसमें बहुत बड़ी साजिश है। इसमें एचईसी क्षेत्र के मौजा लाल खटंगा, नया सराय, हेथू व कई अन्य मौजों की जमीन शामिल है।

राजेश कच्छप ने कहा कि इस साजिश की वजह से विभिन्न मौजों के रैयत काफी डरे हुए हैं। वे उग्र होने की स्थिति में हैं। जमीन से बेदखल किए जाने की कार्रवाई पर खून-खराबा भी हो सकता है। उन्होंने स्पीकर से आग्रह किया कि इस पूरे मामले की जांच के लिए विधानसभा की भी एक कमेटी का गठन हो। लेकिन विभागीय मंत्री ने कहा कि पहले वे सरकार द्वारा करायी जा रही जांच पर विश्वास कर लें। उसके बाद जरूर पड़ेगी तो सदन तय करेगा।

जानकारी के अनुसार एचईसी की स्थापना के लिए 1894 की भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत 13 गांव को पूर्ण रुप से और 22 गांव को आंशिक रुप से विस्थापित किया गया था। उन्हीं में से राजस्व ग्राम लटमा को विस्थापित कर हेथु मौजा में पुनर्वासित किया गया। साल 1961-63 में ही ये गांव पुनर्वासित किया गया। लेकिन अब 2019 से 2025 तक में अधिग्रहित जमीन पर मूल रैयत और भू-माफिया, पदाधिकारियों और कर्मियों की मदद से फर्जीवाड़ा कर पुनर्वासित गांव को अपना बताते हुए ऑनलाइन रसीद के साथ सहायक निबंधक की अदूरदर्शिता के कारण रजिस्ट्री की जा रही है।
