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Ranchi : झारखंड की 3 विलुप्तप्राय जनजातीय भाषाओं पर होगा ये काम, 3 दिवसीय कार्यशाला आयोजित

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रांची: 

अनुवाद  के दौरान  हमें अपनी मूलभाषा के शब्दों को याद रखना आवश्यक है। भाषा की अपनी संस्कृति होती है और अनुवाद में इस पर गंभीरता से ध्यान देना होता है। ’’यह उद्गार रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व भाषा मर्मज्ञ सत्यनारायण मुंडा ने व्यक्त किए। 

तीन दिवसीय अनुवाद कार्यशाला का आयोजन
सत्यानारायण मुंडा राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत (एनबीटी) नई दिल्ली और डॉ० रामदयाल मंडा जनजातीय कलयाण शोध संस्थान, रांची (टीआरआई) के संयुक्त तत्वावधान में आहुत हो रही 3 दिवसीय अनुवाद कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे। इस कार्यशाला में झारखंड की तीन विलुप्त हो रही जनजातीय भाषाओं - सबर, परहैया और कोरवा में बच्चों की 15 पुस्तकों के अनुवाद का कार्य किया जाएगा। यह कार्यशाला 10 मार्च तक चलेगी। 

पारंपरिक नगाड़ा वादन कर हुआ उद्घाटन
उद्घाटन समारोह का प्रारंभ पारंपरिक रूप से नगाड़ा बजा कर किया गया। अतिथियों का स्वागत करते हुए टीआरआई के निदेशक डॉ० रणेन्द्र कुमार ने कहा कि भाषाओं के मरने का अर्थ है- एक संस्कृति का मरना। हजारों सालों में हमारे पूर्वजों ने गुफाओं में चित्र से लेकर मेघों की गर्जना, पंक्षियों की बोली से जिस भाषा का विकास किया, उसका कुछ सौ सालों में लुप्त हो जाता मानव सभ्यता की अपूरणीय क्षति है। एनबीटी के संपादक पंकज चतुर्वेदी ने न्यास और टीआरआई के बीच हुए समझौते के आलोक में किए जा रहे कार्या की जानकारी दी। 

पुस्तकों को पाठकों तक पहुंचाने का तंत्र विकसित हो
इस अवसर पर गुंजन मुंडा ने पुस्तकों को पाठकों तक पहुंचाने का तंत्र विकसित करने की जरूरत पर बल दिया। प्रो० हरि उरांव ने कहा कि यही भाषा आपको पहचान और सम्मान दिला सकती है। श्री महादेव टोप्पों का कहना था कि कोई भी भाषा बड़ी या छोटी नहीं होती। सभी का समान महत्व है और सभी के संरक्षण हेतु ऐसी कार्यशालाएं बहुत महत्वपूर्ण हैं।

अनुदित पांडुलिपियों को बार-बार पढ़ना जरूरी
वंदना टेटे ने अनुवादकों को बताया कि किस तरह अनूदित पांडुलिपि को बार-बार पढें और अपनी पारंपरिक भाषा के शब्द याद कर इस्तेमाल करें। श्री सोमा मुंडा ने लुप्त हो रही भाषाओं का शब्दकोश तैयार करने पर बल दिया। प्रो० के. सी. टूड्डू ने टैगोर की एक कविता का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां हर अनुवादक अपनी भाषा का प्रतिनिधि है ओर उसे अपने समुदाय के हित के लिए लगन से काम करना होगा।

इस अवसर पर  इंदिरा बिरुआ और गणेश मुर्मू ने भी अपने विचार रखे। समापन अवसर पर अनुवादकों ने मांदर बजा कर  अभिनंदन गीत गाया।