द फॉलोअप डेस्क
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी (एई) एक तकनीकी है। जिसे विश्व के कई देश इस्तेमाल कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी मानव समाज एवं सभ्यता के लिए एक वरदान है। एआई से आप उन हर क्षेत्रों में असाधारण सफलता प्राप्त कर सकते हैं, जो अब तक आपके लिए अबूझ है या जो अबतक असंभव था। ये बातें मोरहाबादी मैदान में चले रहे पर्यावरण मेले के सातवें दिन ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उदय और पर्यावरण पर इसका प्रभाव’’ विषय पर आयोजित परिचर्चा में मुंबई से आए मुख्य वक्ता विटी रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष कुंदन कुमार लाल ने कही। झारखंड जैसे राज्य में पानी, ऊर्जा, खनन, वन, कृषि, पर्यावरण एवं प्रदूषण जैसे ऐसे कई विषय है, जिनपर एआई के माध्यम से काफी काम कम समय में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार को इस क्षेत्र में अपना बजट बढ़ाने की अत्यंत आवश्यकता है। अमेरिका ने भारत के कुल बजट से भी ज्यादा एआई में निवेश किया है और अमेरिका में इसका असर दिख रहा है। वहां पर भारत के मुकाबले कम मानव संसाधन का उपयोग कर अधिकतम उत्पादन कर रहा है। भारत के पड़ोसी चीन ने एआई की महता को समय पर पहचान कर आज तकनीक की नई इबारत लिख रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया के 90 प्रतिशत लोगों का पैसा मात्र 10 प्रतिशत धनकुबेरों के पास है। एआई के कारण आने वाले समय में 99 प्रतिशत लोगों का पैसा मात्र 01 प्रतिशत सुपर रिच लोगों के हाथ में चला जाएगा।

भारत की स्थिति होगी खराब
एआई के इस्तेमाल से भारत जैसे बेरोजगारों से भरे देश में तो और भी स्थिति खराब होगी। कुंदन कुमार लाल ने कहा कि इसमें दर्द तो होगा पर आपको फैसला इसी में करना होगा। आपने एक पक्ष देखा कि बेरोजगारी बढ़ जाएगी। आप दूसरे पक्ष को देखें कि हमारी जो नई जेनरेशन तैयार हो रही है। वो अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार करके हजारों-लाखों लोगों को नौकरी भी तो देगी। तय आपको करना है कि आधा गिलास पानी है या आधा गिलास खाली है। वैसे भी, तकनीकी जिस तरीके से आगे बढ़ रही है, भारत में जिस तरीके से मल्टीनेशनल कंपनियां काम कर रही हैं। उस हिसाब से एक दौर वो भी आएगा, जब वे एआई पर ज्यादा भरोसा करेंगी। फिर वो मैनपॉवर का इस्तेमाल क्यों करेंगी। यह भी सोचने वाली बात है।

मानव का जीवन पहले की अपेक्षा काफी सुगम- बाबूलाल
इस परिचर्चा के सम्मानित अतिथि झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जिस तरह से हम हमने अपने पूर्वजों से त्रेता, द्वापर एवं कलयुग की बातें सुनी है। आज के युग को वेद-पुराण के अनुसार कलयुग कहा जाता है। लेकिन मैं इस युग को मशीन युग, तकनीक युग कहता हूं। पिछले कुछ सालों में जिस तरह के आविष्कार हुए हैं वह मानव समाज के लिए काफी लाभदायक हुआ है। मानव का जीवन पहले की अपेक्षा काफी सुगम हुआ है।
मेला का किया अवलोकन
मेला का अवलोकन बाबूलाल मरांडी ने किया। मेला घूमने आए लोग अपने जरूरत के सामान खरीदते नजर आए। खाने-पीने के दुकानों के साथ-साथ यहां लगे सभी स्टॉलों में काफी भीड़ रही। मेला में टाटा मोटर्स एवं कीया मोटर्स ने अपने नवीनतम मॉडल के गाड़ियों की प्रदर्शनी भी मेले में लगाई है। परिचर्चा के उपरांत संध्या 7 बजे से बनारस घराने से आए हुए संतुर कलाकार दिव्यांश हर्षित श्रीवास्तव, पखावज कलाकार, डॉ. अंकित पारिख एवं तबला वादक श्रुति शील उद्धव ने संतुर, पखावज और तबला के सम्मिश्रण से मेले में एक नया शमां बांध दिया।

1 से 3 मार्च तक निशुल्क रहेगा प्रवेश
पर्यावरण मेला में सात दिन तक प्रवेश के लिए 10 रुपए का टिकट रखा गया था। मगर मेले में लोगों की बढ़ती रूचि एवं विद्यार्थियों की प्रकृति एवं पर्यावरण के बारे में जानने की जिजीविषा एवं जिज्ञासा को देखते हुए 01 मार्च से 03 मार्च तक मेले में प्रवेश करने के लिए अब पैसा नहीं देना होगा। यह पूर्णतः निःशुल्क होगा। यह जानकारी मेले के संयोजक डॉ. एमके जमुआर ने दी।
हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें : https://chat.whatsapp.com/EUEWO6nPYbgCd9cmfjHjxT