द फॉलोअप डेस्क
राज्य में नए निवेश को बढ़ावा देने के साथ वैसे निवेशक जो पहले से झारखंड में निवेश किए हुए हैं, उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। यह बातें उद्योग सचिव वंदना डाडेल ने चैंबर भवन में स्टेकहोल्डर्स के साथ सीधे संवाद में कही। झारखंड बनने के बाद पहली बार उद्योग विभाग के उच्चाधिकारियों का एक साथ जुटान 12 जनवरी को चैंबर भवन में हुआ। जिसमें उद्योग सचिव, उद्योग निदेशक के अलावा जियाडा के सभी रिजनल डायरेक्टर की उपस्थिति में स्टेकहोल्डर्स के साथ सीधा संवाद किया गया। इसमें उद्योग सचिव ने कहा कि झारखंड में निवेशकों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से नई औद्योगिक एवं प्रोत्साहन नीति बनाई गई है। सरकार की कोशिश है कि सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सभी निवेशकों के आवेदन को ससमय निष्पादित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में उद्योगों की स्थापना के लिए लंबित आवेदनों को खत्म करना विभाग और सरकार की प्राथमिकता है।

उद्योग सचिव ने मांगा सुझाव
उद्योग सचिव वंदना डाडेल ने विभाग और स्टेकहोल्डर्स के आपसी समन्वय से समस्याओं के निष्पादन की बात कही। यह भी कहा कि आप सुझाव दें और अपने आइडिया शेयर करें। कहीं भी कोई समस्या हो, दिक्कत आए तो बात करें। सरकार आपके साथ खड़ी है। राज्य में उद्योग की स्थापना एवं विकास की ओर हम मिलकर आगे बढ़ेंगे। मोर्गेज और लीज अवधि बढाने पर भी उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों की पॉलिसी की समीक्षा कर, उचित सुधार किया जाएगा। औद्योगिक निवेश के अनुकूल नीतियों को क्रियान्वित करने के लिए विभाग स्वयं भी इसपर कार्रवाई कर रहा है। विभाग द्वारा 18 राज्यों के विभागों से वार्ता की गई है, अन्य राज्यों में भी हमारी टीम जाकर उनकी नीतियों की समीक्षा करेगी। मामले अधिक दिनों तक लंबित न हो, इसके लिए प्रत्येक दो माह में समीक्षात्मक बैठकों पर भी विचार किया जायेगा।

संवाद की इस कड़ी को जारी रखी जाए- किशोर मंत्री
राज्य के औद्योगिक विकास के लिए उद्योग विभाग और स्टेकहोल्डर्स के बीच सीधे संवाद की जरूरत चैंबर अध्यक्ष किशोर मंत्री ने कही। उन्होंने कहा कि हम राज्य के विकास से जुड़ी सरकार की हर नीतियों के क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हैं। आवश्यक है कि उद्योग विभाग द्वारा हमें विकासशील नीतियों में सहभागी बनाई जाए और संवाद की इस कड़ी को जारी रखा जाए। उन्होंने जियाडा द्वारा लैंड एलॉटमेंट पद्धति में संशोधन की आवश्यकता, औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित भूमि पर कब्जा में परेशानी, सब्सिडी के रिम्बर्समेंट में समस्या, डेट ऑफ प्रोडक्शन सर्टिफिकेट के मिलने में विलंब, राजस्व संग्रह में वृद्धि के साथ ही रोजगार सृजन के लिए बंद पडे खदानों को जल्द चालू करने तथा सिंगल विंडो सिस्टम के पूर्णरूपेण कार्यरत नहीं रहने के कारण हो रही समस्याओं से अवगत कराया। यह भी कहा कि सरकार की ओर से एमएसएमई से 25 फीसदी प्रोक्योरमेंट होना चाहिए जो आज किसी कारण से नहीं होता। यदि एमएसएमई से 25 फीसदी प्रोक्योरमेंट होने लगे तो आज जो यूनिटस बैठी हुई हैं, वे अपने प्रोडक्शन को बढाएंगी और जो 60-70 फीसदी क्षमता पर चल रही हैं, वे 100 फीसदी क्षमता से चलेंगी।

समस्याओं की दी गई जानकारी
राज्य के उद्यमियों की ओर से प्राप्त समस्याओं का संकलन कर चैंबर की ओर से उद्योग सचिव को ज्ञापन सौंपा गया। उद्योग उप समिति के चेयरमेन बिनोद अग्रवाल और उद्यमी अजय भंडारी ने संयुक्त रूप से कहा कि उद्योग विभाग को बाहरी निवेशकों को प्राथमिकता देने की बजाय स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की पहल करनी चाहिए क्योंकि हम ही रियल इन्वेस्टर्स हैं। जब पूर्व से स्थापित उद्योगों की हालत ठीक होगी, तब नए निवेश स्वतः ही आयेंगे। यह भी अवगत कराया कि जियाडा द्वारा भूमि के आंशिक हस्तांतरण की अनुमति देते हुए नये पट्टेदार से 100 प्रतिशत भुगतान की मांग की जाती है जबकि 15 प्रतिशत की दर से एक बार आंशिक हस्तांतरण की अनुमति देनी चाहिए। औद्योगिक क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि जहां एक ओर औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा जैसे पानी, नालियां और स्ट्रीट लाइट गायब हैं। वहीं अनावश्यक गतिविधियों पर भारी मात्रा में राशि खर्च की जा रही है। जबकि इस कार्य में जियाडा को स्टेकहोल्डर्स का सहयोग और परामर्श लेना चाहिए।
लीज डीड 90 वर्ष तक किया जाए
बैठक के दौरान कई उद्यमियों ने अन्य समस्याएं भी रखीं। जिनमें लीज डीड को 30 वर्ष से 90 वर्ष करने, प्रोडक्शन सर्टिफिकेट देने की व्यवस्था ऑनलाइन करने, पावरकट से औद्योगिक उत्पादन में कठिनाई, नए इंटरप्रिन्योर को प्रोत्साहित करने की दिशा में पहल, औद्योगिक नीति के तहत घोषित सब्सिडी मिलने में विलंब आदि अन्य समस्याएं शामिल हैं।

हर स्तर पर होगी कार्रवाई
उद्योग निदेशक जितेंद्र कुमार सिंह ने बैठक में सभी को आश्वस्त किया कि राज्य के उद्यमियों के प्रोत्साहन के लिए विभाग द्वारा हर स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि एडवांटेज झारखंड पोर्टल के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम से ही उद्योग विभाग से जुड़े सारे क्लियरेंसेस समयबद्ध रूप से क्लियर किये जा रहे हैं। जिसकी रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सकती है। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि वित्तिय वर्ष 2022-23 में पीएम गति शक्ति योजना के तहत 169 करोड रुपए के प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए हैं। जिस अंतर्गत निरसा में 35 एकड भूमि पर लॉजिस्टीक पार्क का निर्माण और रांची में ट्रांसपोर्ट नगर का निर्माण होना है। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में डेवलपमेंट होने से लॉजिस्टीक सेक्टर में मोमेंटम जेनरेट होगा। उन्होंने देवघर प्लास्टिक पार्क में खाली पड़े भूखंडों में उद्यमियों से आवेदन करने की अपील की। बैठक में चैंबर महासचिव डॉ. अभिषेक रामाधीन ने कहा कि सरकार का प्रयास सराहनीय है। उद्योगों की स्थापना के साथ ही इकाईयों की समस्याओं के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से बात हुई है जिससे यह साबित होता है कि विभाग और वर्तमान सरकार राज्य में उद्योगों की स्थापना को लेकर संवेदनशील है। बैठक का मंच संचालन प्रवक्ता ज्योति कुमारी ने करते हुए राज्य के औद्योगिक विकास के लिए किये जा रहे प्रयासों के लिए विभागीय उच्चाधिकारियों को धन्यवाद दिया।

बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में उद्योग जियाडा रांची के रिजनल डायरेक्टर अजय कुमार सिंह, सचिव नागेंद्र पासवान, बियाडा के अनुज कुमार, बोकारो की कीर्तिश्री, आदित्यपुर की प्रेम रंजन, एसपीयाडा के शैलेंद्र लाल, चैंबर उपाध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश महतो, पूर्व अध्यक्ष रंजीत टिबडेवाल, कार्यकारिणी सदस्य परेश गट्टानी, विकास विजयवर्गीय, उद्योग उप समिति के चेयरमेन बिनोद अग्रवाल, उद्यमी अजय भंडारी, बिनोद तुलस्यान, सुरेश अग्रवाल, एसपी सिंह, एसके प्रसाद, सुबोध प्रसाद, मिथुन तिवारी, अमन चौरसिया, एनके पाटोदिया, कमल अग्रवाल, शैलेंद्र सुमन, अनिश सिंह, राजीव अग्रवाल, आदित्य अग्रवाल, राजेष बुधिया, दीपक अग्रवाल, मधुसूदन अग्रवाल, रमाकांत सिंह, किशन अग्रवाल, अविनाश चंद्रा, जेपी शर्मा, मनीष साहू, सुधीर सिंह के अलावा सैकड़ों उद्यमी उपस्थित थे।