द फॉलोअप डेस्क
मौसम की तरह नगर निकाय चुनाव की तपिश भी बढ़ती जा रही है। जैसे जैसे गर्मी बढ़ रही है, चुनाव की सरगर्मी भी तेज हो रही है। वैसे तो लगभग सभी नगर निगमों के मेयर पद पर एक ही दल के एक से अधिक प्रत्याशी खड़े हो गए हैं। खम ठोक रहे हैं। लेकिन देवघर नगर निगम में पार्टी समर्थित उम्मीदवार के विरुद्ध उसी दल के दूसरे प्रत्याशी के डटे रह जाने के पीछे के कारण एक से हैं। पिछले कई वर्षों से जन समस्याओं को लेकर लड़ाई किसी ने लड़ी और अंत में जब दलों ने जब समर्थन किसी और का कर दिया तो बगावत सामने आ गयी।

जानकारी के अनुसार देवघर नगर निगम क्षेत्र में सूरज कुमार झा पिछले कुछ वर्षों से काफी सक्रिय थे। झामुमो का जब वहां बहुत कम ही लोग झंडा लेकर जिंदावाद का नारा लगानेवाले थे, उस अवधि में उन्होंने तीर-धनुष के साथ होकर जनता की खूब सेवा की। गर्मी के दिनों में पानी की किल्लत से लोगों को निजात दिलाया। पंडा समाज का होने के बाद भी वे झामुमो का झंडा मजबूती से थामे रहे। लेकिन जब मेयर पद पर समर्थन का समय आया तो पार्टी रवि राउत के पक्ष में खड़ा हो गयी। इसमें मंत्री हफीजुल हसन की प्रभावी भूमिका रही। परिणाम स्वाभाविक था। सूरज कुमार झा ने नामांकन वापस नहीं लिया। निर्दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में डटे रह गए। अब सूरज कुमार झा अपने ही दल के समर्थित प्रत्याशी रवि राउत की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।

कुछ इसी तरह की स्थिति भाजपा में भी बनी। भाजपा के वरिष्ठ नेता नागेंद्र नाथ बलियासे वहां वर्षों से मेयर पद के लिए मेहनत कर रहे थे। भाजपा नेता के रूप में जनता के बीच जा रहे थे। जनता की समस्याओं को दूर करने में लगे थे। लेकिन देवघर नगर निगम के मेयर पद के चुनाव में भाजपा ने रीता चौरसिया के साथ होना बेहतर समझा। हालांकि जानकार बताते हैं कि आदित्य प्रसाद साहु के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने से यह स्थिति बनी। साहु का चौरसिया का साथ मिला। फिर यहां भी नागेंद्र नाथ बलियासे भी बागी बन गए। अब वह भाजपा समर्थित रीता चौरसिया का चुनाव में ब्लड प्रेशर बढ़ा रहे हैं। कांग्रेस की स्थिति भी यहां कमोवेश यही है। डॉ गौरव कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार के रूप में ही अपना नामांकन दाखिल किया था। लेकिन अब तक कांग्रेस ने उनका समर्थन नहीं किया है। पेंच फंसा हुआ है।
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