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अशोक नगर रास्ता विवाद पहुंचा झारखंड HC, IPS और पत्रकार के मामले में 6 नवंबर को होगी सुनवाई

अशोक नगर रास्ता विवाद पहुंचा झारखंड HC, IPS और पत्रकार के मामले में 6 नवंबर को होगी सुनवाई

रांची

राजधानी रांची (Ranchi) के VIP इलाके (VIP Area) अशोक नगर रोड नंबर-1 (Ashok Nagar Road No. 1) में सीनियर IPS (Senior IPS Officer) व रेल DIG (Railway Deputy Inspector General) प्रियदर्शी आलोक (Priyadarshi Alok) और पत्रकार (Journalist) सैयद शरीफ इब्राहिम (Syed Sharif Ibrahim) के बीच का रास्ता विवाद (Road Access Dispute) अब झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) पहुंच चुका है। थाने (Police Station) से लेकर पुलिस-प्रशासन (Police Administration) के आला अफसरों (Senior Officials) के चक्कर काटने के बाद भी जब रास्ता नहीं खुला और पीड़ित परिवार (Affected Family) अपने ही घर में बंधक (Confined) बना रहा, तो इंसाफ की गुहार लेकर हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका (Criminal Writ Petition) दाखिल की गई। बुधवार को इस बहुचर्चित मामले (High-Profile Case) पर हाईकोर्ट में बेहद जोरदार और तीखी बहस (Heated Arguments) देखने को मिली। प्रार्थी (Petitioner) की ओर से राज्य के पूर्व महाधिवक्ता (Former Advocate General) व वरीय अधिवक्ता (Senior Advocate) अजीत कुमार (Ajit Kumar) ने कोर्ट (Court) के समक्ष पुलिसिया मनमानी (Police Arbitrariness) और प्रशासनिक लाचारी (Administrative Helplessness) की पूरी दास्तान मजबूती से रखी। अदालत (Court) ने मामले की गंभीरता और विवाद की कड़ियों को देखते हुए अशोक नगर हाउसिंग कोऑपरेटिव सोसाइटी (Ashok Nagar Housing Cooperative Society) को भी इस मामले में पक्षकार (Respondent) बनाने का निर्देश दिया है। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले (High-Profile Case) पर अगली अहम सुनवाई (Next Important Hearing) 6 नवंबर (November 6) को मुकर्रर की गई है।


 

अदालत में जोरदार बहस, राज्य सरकार और रेल DIG बनाए गए प्रतिवादी

झारखंड हाईकोर्ट में दाखिल इस क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार के साथ अधिवक्ता सौरभ दास और फहीम अख्तर ने पक्ष रखा। अदालत को बताया गया कि किस तरह एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के प्रभाव में आकर स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है और अदालती प्रक्रिया चलने के बावजूद एक परिवार का मौलिक अधिकार छीना जा रहा है। इस याचिका में राज्य सरकार, रांची के DC, SDM सदर, अरगोड़ा थाना प्रभारी और वर्तमान में रेल DIG के पद पर तैनात IPS प्रियदर्शी आलोक को सीधे तौर पर प्रतिवादी बनाया गया है। अदालत ने पूरे परिप्रेक्ष्य को समझने के लिए अशोक नगर सोसाइटी की भूमिका को भी आवश्यक माना और उसे पक्षकार बनाने का आदेश पारित किया, ताकि रास्ते की वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सके।

1963 से रिहाइश और RRDA का नक्शा, फिर 6 परिवारों की घेराबंदी क्यों?

याचिका में दस्तावेजों के हवाले से अदालत को बताया गया कि सैयद शरीफ इब्राहिम का परिवार वर्ष 1963 से ही अशोक नगर रोड नंबर-1 की 40 फीट चौड़ी मुख्य सड़क से जुड़े इस रास्ते का इस्तेमाल करता आ रहा है। वर्ष 1991 में रांची रीजनल डेवलपमेंट अथॉरिटी (RRDA) से बाकायदा पास कराए गए भवन के नक्शे में भी इस 12 फीट चौड़े निजी पहुंच मार्ग का साफ उल्लेख है। वर्तमान में इस आवासीय परिसर के भीतर 5 अलग-अलग मकानों में करीब छह परिवार रहते हैं। इन सभी परिवारों, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, के आने-जाने का यही एकमात्र रास्ता है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि रेल DIG प्रियदर्शी आलोक ने अपने पद और रसूख का दुरुपयोग करते हुए इस वैध रास्ते को गैरकानूनी तरीके से बंद कर दिया है, जिससे आधा दर्जन परिवारों का सामान्य जीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है।

SDM के नोटिस को ठेंगा, रात के अंधेरे में डंप किए गए ईंट-पत्थर

मामले में प्रशासनिक अनदेखी की परतें खोलते हुए अदालत को बताया गया कि रांची DC और SDM सदर से शिकायत के बाद संबंधित अंचल अधिकारी (CO) ने जांच रिपोर्ट सौंपी थी। उसी रिपोर्ट के आधार पर SDM कोर्ट में धारा 166 BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) के तहत मिसलेनियस केस (वाद संख्या M-2842/2026) शुरू किया गया और नोटिस जारी हुआ। लेकिन कानून के पालन की जगह खाकी की हनक दिखाई गई। नोटिस जारी होने के बावजूद 3 और 4 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात के अंधेरे में बाकायदा साजिश के तहत मुख्य गेट के ठीक सामने ईंटों और बड़े-बड़े पत्थरों का ढेर लगाकर स्थायी दीवार खड़ी करने की कोशिश की गई। याचिका में इन पत्थरों और बंद रास्ते की तस्वीरें भी सुबूत के तौर पर अदालत के सामने पेश की गई हैं।

AK-47 से भूनने की धमकी और एंबुलेंस तक का रास्ता रोकने का आरोप

याचिका में 29 सितंबर 2026 की उस खौफनाक शाम का भी विस्तार से ब्योरा दिया गया है, जब शाम करीब 6 बजे रेल DIG द्वारा इस्तेमाल की जा रही सरकारी स्कॉर्पियो (JH01CC-2556) को प्रार्थी के गेट के ठीक सामने आड़ा खड़ा कर दिया गया। जब परिवार ने गाड़ी हटाने का अनुरोध किया, तो आरोप है कि अधिकारी अपने हथियारबंद बॉडीगार्ड्स के साथ पहुंचे और आपा खोते हुए AK-47 से गोली चलाने की धमकी दी। साथ ही यह भी कहा गया कि अगर कोई गाड़ी के करीब आया तो जान से हाथ धोना पड़ेगा और पूरे परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाकर जिंदगी बर्बाद कर दी जाएगी। प्रार्थी ने उसी रात अरगोड़ा थाने में लिखित शिकायत दी थी, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का नाम होने के चलते पुलिस ने चुप्पी साध ली। याचिका में यह गंभीर चिंता जताई गई है कि रास्ता पूरी तरह बंद होने से एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड या पुलिस की गाड़ी का घर तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है, जिससे कभी भी कोई बड़ा जानलेवा संकट खड़ा हो सकता है।

हाईकोर्ट से लगाई न्याय की गुहार, रास्ते की बहाली और सुरक्षा की मांग

पत्रकार सैयद शारीफ़ इब्राहिम ने क्रिमिनल रिट याचिका के जरिए हाईकोर्ट से स्पष्ट हस्तक्षेप की मांग की है। याचिका में अदालत से प्रार्थना की गई है कि अशोक नगर रोड नंबर-1 से उनके आवास तक जाने वाले रास्ते को तत्काल निर्बाध किया जाए और गेट के सामने से ईंट, पत्थर, वाहन या निर्माण सामग्री के तमाम अवरोध तुरंत हटाने के आदेश दिए जाएं। साथ ही 29 सितंबर को अरगोड़ा थाने में दी गई शिकायत, जिसमें रास्ता रोकने, हथियारबंद जवानों की तैनाती और AK-47 से गोली मारने की धमकी जैसे संगीन आरोप शामिल हैं, उस पर निष्पक्ष जांच कर संज्ञेय अपराध के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। इसके अलावा SDM सदर की अदालत में चल रहे वाद के त्वरित निष्पादन, अंतरिम राहत के रूप में रास्ते की तत्काल बहाली और पीड़ित परिवार के जान-माल व गरिमा की रक्षा के लिए अरगोड़ा पुलिस को पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है। अब 6 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर पूरे प्रशासनिक और न्यायिक महकमे की नजरें टिकी हैं।


 

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