द फॉलोअप डेस्क
दिवाली (Diwali) नज़दीक आते ही, नलबाड़ी (Nalbari) ज़िले के निज बहजानी (Nij Bahjani) गांव के पारंपरिक आतिशबाज़ी कारीगर (Traditional Fireworks Artisans) तरह-तरह के पटाखे (Firecrackers) बनाने में व्यस्त हैं। बाज़ार में मौजूद चीनी उत्पादों (Chinese Products) को टक्कर देने के लिए, यहां के स्थानीय कारीगर (Local Artisans) अलग-अलग आकार और प्रकार के पटाखे तैयार करने में पूरी तरह जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि निज बहजानी गांव के उत्तरी इलाके में स्थित 'त्रिनयन भंडार' (Trinayan Bhandar) में, जयंत तालुकदार (Jayanta Talukdar) की देखरेख में लगभग 40 कारीगर (Artisans) काम कर रहे हैं। इन्होंने पिछले दो महीनों में एक लाख से ज़्यादा पटाखे (Over 100,000 Firecrackers) बनाए हैं, जो दिवाली (Diwali Festival) पर आसमान को रोशन करेंगे।

कारीगरों ने कई तरह के पटाखे हाथ से बनाए
मिली खबर के मुताबिक, इन कारीगरों ने कई तरह के पटाखे हाथ से बनाए हैं, जिनमें आकाश गंगा, फुलझड़ी, कोलगाछ, गैस बम, पटाखे, चॉकलेट बम, लाइट ट्री, मोटा बम, चरेकी और पेंसिल बम आदि शामिल हैं। हालांकि अभी हमारे राज्य में विदेशी सामानों की भरमार है, लेकिन 'त्रिनयन भंडार' में बने स्थानीय पटाखों को विदेशी उत्पादों से कहीं बेहतर बताया जा रहा है। इनमें आग लगने या किसी तरह की चोट लगने का ख़तरा भी नहीं है।

कहां से मिली प्रेरणा
इस आतिशबाज़ी इकाई के मालिक जयंत तालुकदार, दिगंत तालुकदार और हेमंत तालुकदार का कहना है कि उनके स्वर्गीय पिता हरकांत तालुकदार और मां नीलिमा तालुकदार उनके लिए प्रेरणा के सबसे बड़े स्रोत थे। अपने माता-पिता से प्रेरित होकर, वे इस पारंपरिक कला को बचाने के काम में लगे हुए हैं। उन्होंने इस काम में कई अन्य लोगों को भी शामिल किया है, जिससे उन्हें अपनी आजीविका चलाने और जीवन-संघर्ष में मदद मिल रही है।

