द फॉलोअप डेस्क
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह (Ram Mandir Pran Pratistha Ceremony) में सभी 4 शंकराचार्यों के नहीं शामिल को लेकर पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद महाराज ने बयान दिया है। कहा है कि ये अहंकार या दंभ का मामला नहीं है, शंकराचार्य अपनी गरिमा को बचाये रखने के लिए हर संभव कदम उठा सकते है। शंकराचार्य पद की गरिमा को बचाये रखने का दायित्व भी शंकराचार्य पर ही होता है। इसलिए इसे नकारात्मक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिये। बता दें कि 22 जनवरी को पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों अयोध्या में निर्मित राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इसे लेकर सियासी चर्चाओं का बाजार भी गर्म है।

क्या कहा स्वामी निश्चलानंद महाराज ने
पुरी के शंकराचार्य ने कहा, "शंकराचार्य अपनी गरिमा बनाए रखते हैं। यह अहंकार नहीं है। क्या हमसे उम्मीद की जाती है कि जब प्रधानमंत्री रामलला की मूर्ति स्थापित करेंगे तो हम बाहर बैठेंगे और तालियां बजाएंगे? 'धर्मनिरपेक्ष' सरकार होने का मतलब यह नहीं है कि परंपराएं खत्म हो जाएं।" शंकराचार्य के इस बयान की देशभर में चर्चा हो रही है। विपक्षी दलों ने इस बयान को हथियार बनाकर केंद्र सरकार पर हमला करना शुरू कर दिया है।

विपक्षी दलों ने लिया बीजेपी को निशाने पर
बता दें कि कांग्रेस, सपा, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों ने पहले ही प्राण प्रतिष्ठा में शामिल नहीं होने की बात कह दी है। ऐसे में पुरी के शंकराचार्य के बयान को आधार बनाकर कांग्रेस ने बीजेपी पर हमला किया है। पार्टी के नेता अशोक गहलोत ने कहा है कि हमारे शंकराचार्य भी अयोध्या नहीं जायेंगे। इससे साबित होता है कि हमारा समारोह में नहीं हिस्सा लेना कितना महत्वपूर्ण है। गहलोत ने दोहराया कि ये धार्मिक नहीं पूरी तरह से राजनीतिक आयोजन है। बीजेपी पीएम मोदी के हाथों प्राण प्रतिष्ठा कराकर इसका लाभ चुनाव में लेना चाहती है।
