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10 दिन में पलट गयी अशोक मित्तल की कहानी, AAP के डिप्टी लीडर बने; ED आई और फिर चल दिये भाजपा की राह

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द फॉलोअप डेस्क 

अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी एक बार फिर से संकट में घिर गयी दिखाई दिख रही है। ताजा घटनाक्रम में पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 ने इस्तीफा देकर बीजेपी से से नाता जोड़ लिया। इसकी अधिकारिक सूचना राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। इस दौरान राघव ने आप पर जमकर हमला बोला। इसके जवाब में आप के सीनियर लीडर संजय सिंह ने प्रेस वार्ता की। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले सातों सांसदों की आलोचना की और इसके पीछे भाजपा के ऑपरेशन लोटस के तहत साजिश का आरोप लगाया। इसका आधार भी है। दरअसल, आप से नाता तोड़ने वालों में एक बड़ा नाम अशोक मित्तल का भी है। बता दें कि राज्यसभा से राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद केजरीवाल ने अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उपनेता की कमान सौंपी थी।

हाल ही में मित्तल कई ठिकानों पर ED ने छापेमारी की है

लेकिन आज नाटकीय रूप से राघव चड्ढा और अशोक मित्तल ने एक साथ आम आदमी पार्टी से किनारा कर लिया। इसे लेकर अब सियासी गलियारे में तरह-तरह की चर्चा है। हाल ही में मित्तल कई ठिकानों पर ED ने छापेमारी की है। यहां जानना जरूरी है कि अशोक मित्तल पंजाब में लवली यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं। लवली ऑटोज़ और लवली स्वीट्स जैसे संस्थान भी उनके हैं। ED ने इन सभी जगहों पर छापेमारी की थी। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप थे। लवली ग्रुप का सालाना टर्नओवर 850 करोड़ रुपये है। बहरहाल, उस पूरे प्रकरण को इस तरह से देखा जा रहा है, 2 अप्रैल को मित्तल डिप्टी लीडर बने और इसके 10वें दिन ED की छापेमारी हो गई। इसके बाद बिना देरी किये उन्हेंने AAP से इस्तीफा दिया औऱ भाजपा  में शामिल हो गए। वहीं, आप ED की इस कार्रवाई की वजह भाजपा का ऑपरेशन लोटस बता रही है, जिसके जरिये नेताओं पर उनकी पार्टी छोड़ने का दबाव बनाने के आरोप लगते रहे हैं।   
बहरहाल, नाटकीय राजनीतिक घटना में, राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने जब भाजपा के साथ “मर्जर” करने की घोषणा की तो ये सवाल भी उठने लगा कि क्या ये कदम कानूनी रूप से वैध है? और ये कि क्या चड्ढा और बाकी छह अन्य सांसद राज्यसभा में दो-तिहाई महत्वपूर्ण संख्या को पार करके एंटी-डिफेक्शन लॉ के तहत डिसक्वालिफाई होने से बच जाएंगे?


एंटी-डिफेक्शन लॉ क्या कहता है? 
यह सिर्फ सियासी लफ्जों का खेल नहीं है। संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत, कोई सांसद डिसक्वालिफाई होने से तभी बच सकता है जब किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई विधायक दूसरी पार्टी में मर्ज होने के लिए सहमत हो जायें। इस मामले में चड्ढा ने सोशल  मीडिया पर एक पोस्ट में साफ तौर पर कहा, “हम, राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) के दो-तिहाई सांसद, भारत के संविधान के नियमों का पालन करेंगे और भारतीय जनता पार्टी में मर्ज कर जाएंगे।” फिलहाल आप के अभी 10 राज्यसभा सांसद हैं। चड्ढा ने दावा किया कि उनमें से सात अब उनके साथ हैं। इनके नाम हैं- 

  1. राघव चड्ढा
  2. अशोक कुमार मित्तल
  3. संदीप पाठक
  4. हरभजन सिंह
  5. राजिंदर गुप्ता
  6. विक्रमजीत सिंह साहनी
  7. स्वाति मालीवाल

इनमें से ज़्यादातर सांसद पंजाब से संबंधित हैं और राज्य में सियासी समीकरणों के बदलाव में दखल रखते हैं। इनमें पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी संदीप पाठक का नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने राज्य में अहम संगठनात्मक  भूमिका निभाई है। पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह भी इस ग्रुप का हिस्सा हैं, जिससे इस कदम को पब्लिक में पहचान मिली है।


 

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