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नींद नहीं पूरी होने पर भालू हो रहे चिड़चिड़े, लोगों पर कर रहे हमला 

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द फॉलोअप डेस्कः 
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कम बर्फबारी होने का असर जंगलों में रह रहे भालू पर भी पड़ रहा है। अधिक ठंड होने पर शीतनिद्रा में जाने वाले भालू चिड़चिड़े हो रहे हैं। अब भालू लोगों पर हमला कर रहे हैं। बीते 15 दिनों में नैनीताल समेत उत्तराखंड में भालू के हुमलों की चार घटनाएं सामने आई हैं। दरअसल पर्वतीय क्षेत्रों में दिसंबर से बर्फबारी शुरू हो जाती थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। इस साल भी अब तक बर्फबारी नहीं हुई है। इसका असर वन्यजीवों पर पड़ रहा है। 


शीतनिद्रा में खलल हो रहा 
वाइल्डलाइफ पर वर्ष 2003 में पीएचडी कर चुके कॉर्बेट फाउंडेशन के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. हरेंद्र बर्गली के अनुसार, इस बार बर्फबारी में कमी से भालुओं की शीतनिद्रा प्रभावित हो रही है। इस वजह से वह इंसानों पर हमला कर रहे हैं। जंगल में रहने वाले भालू की उम्र 12 से 15 साल और चिड़ियाघर में 20 साल तक मानी जाती है। तीन साल का भालू हमलावर हो सकता है। जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से भी भालू हमलावर हो रहे हैं। 


भालूओं के हमले में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी 
मादा भालू बच्चों पर खतरा होने की स्थिति में हमला करती है। बर्गली ने बताया कि हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में भालुओं के हमलों पर शोध किया जा चुका है। वहां बीते तीन सालों में भालुओं के हमलों में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों के जंगलों में स्लॉथ बियर, पहाड़ी इलाकों में काला भालू व बर्फबारी वाले स्थानों पर भूरे भालू पाए जाते हैं। काला भालू सबसे खतरनाक माना जाता है। बर्फबारी अधिक होने पर भालू शरीर की ऊर्जा बचाने को शीतनिद्रा में चले जाते हैं।