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गंगोत्री से लगे धराली में भारी तबाही : सेना के 11 जवान लापता, कैंप आया चपेट में; केरल के 28 टूरिस्ट भी गायब 

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द फॉलोअप डेस्क 

उत्तरकाशी (उत्तराखंड): उत्तरकाशी जिले के धराली, हर्षिल और सुखी टॉप क्षेत्रों में बुधवार को बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई। आपदा में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सेना के 11 जवान लापता बताए जा रहे हैं। सेना का एक कैंप भी मलबे की चपेट में आ गया। हादसे के बाद से इलाके में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। धराली की घटना के बाद से केरल के 28 पर्यटकों का एक समूह लापता है। परिजनों का कहना है कि एक दिन पहले उन्होंने गंगोत्री जाने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में उनका संपर्क टूट गया। प्रशासन उनकी तलाश में जुटा है।

ITBP, NDRF, SDRF और सेना की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। ITBP प्रवक्ता कमलेश कमल ने जानकारी दी कि अब तक 400 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है, जबकि 100 से ज्यादा लोग अभी भी फंसे हुए हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि शाम तक बाकी लोगों को भी सुरक्षित निकाल लिया जाएगा।


बादल फटने की वजह से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे राहत कार्यों में बाधा आ रही है। प्रभावित इलाकों में संचार सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बात कर हालात की जानकारी ली। मुख्यमंत्री धामी ने इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और अधिकारियों के साथ आपदा प्रबंधन की समीक्षा बैठक की।
धराली में सबसे अधिक तबाही
गंगोत्री धाम की ओर जाने वाले प्रमुख पड़ाव धराली गांव में सबसे अधिक तबाही देखी गई। स्थानीय बाजार, मकान और कई होटल खीर गंगा नदी में बह गए। बताया जा रहा है कि यह पूरी तबाही महज 34 सेकंड में घटित हुई।
धराली गांव पहले भी प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में रहा है। वर्ष 1864, 2013 और 2014 में भी यहां बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं। वरिष्ठ भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. एसपी सती ने बताया कि यह क्षेत्र हिमालय की संवेदनशील दरार पर बसा है और आपदा के लिहाज से 'टाइम बम' की स्थिति में है। वैज्ञानिकों ने राज्य सरकार को धराली को दूसरी सुरक्षित जगह बसाने की सिफारिश पहले भी दी थी, लेकिन इस पर अमल नहीं हुआ।

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