नई दिल्ली
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने दक्षिण अफ्रीका के क्लेनमंड में आयोजित 11वें जी-20 संसदीय अध्यक्षों के शिखर सम्मेलन (पी20) में सक्रिय भागीदारी निभाई और रूस, जर्मनी, इटली तथा मेजबान दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों के संसदीय प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। ये बैठकें संसदीय सहयोग को और प्रगाढ़ बनाने के साथ-साथ व्यापार, तकनीक और सतत विकास पर भारत के दृष्टिकोण को साझा करने के उद्देश्य से आयोजित की गईं।
इन मुलाकातों के दौरान उपसभापति ने उन भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों का भी उल्लेख किया जिन्होंने हाल ही में आतंकवाद के खिलाफ भारत की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए विभिन्न देशों की यात्रा की थी, विशेषकर पहलगाम आतंकी घटना और ऑपरेशन सिंदूर के परिप्रेक्ष्य में।

रूस की फेडरेशन काउंसिल के डिप्टी स्पीकर कोंस्टैंटिन कोसाचेव से अपनी बैठक में उन्होंने भारत-रूस के दीर्घकालिक और बहुआयामी सहयोग को याद करते हुए विभिन्न रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा की। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में भाग लेते हुए उपसभापति हरिवंश ने 'न्यायोचित ऊर्जा संक्रमण के लिए वित्तपोषण' विषय पर वक्तव्य दिया और ‘समावेशी एवं सतत विकास हेतु महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका’ विषयक सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) को रेखांकित करते हुए कहा कि यह मिशन घरेलू खोज, तकनीकी नवाचार और वैश्विक सहयोग को एकजुट कर आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा, “हमें केवल अपनी जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी मूल्य श्रृंखलाएं भी विकसित करनी चाहिए जो वैश्विक स्थिरता और साझा जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक हों।”
