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करोड़ों होंगे खर्च तो इंडिया बनेगा भारत, नई बहस के बीच देखें ये आंकड़ा

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द फॉलोअप डेस्कः 
देश में अब भारत और इंडिया पर बहस तेज हो गई है। एक चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि क्या अब देश का भी नाम भारत या इंडिया में से कोई एक हो जाएगा। दरअसल, फिलहाल आधिकारिक रूप से दोनों नाम इस्तेमाल होते हैं। अग्रेजी में इंडिया और हिंदी में भारत, लेकिन अगर केंद्र सरकार ने सिर्फ भारत नाम को देश का नाम घोषित किया तो इसमें कितना खर्च लग जाएगा ये आपको बताते हैं। वैसे भारत पहला देश नहीं जहां नाम बदले जाने या बदल देने की बात हो रही है। ऐसे बदलाव समय-समय पर कई देशों में पहले भी हुए हैं। हर बदलाव अपने साथ कुछ न कुछ खर्च लेकर चलता है। सभी बदलाव बिना किसी खर्च के नहीं होते। ऐसा ही देश के लेवल पर होता है। नाम बदला जाएगा तो सभी डॉक्यूमेंट्स, आधिकारिक वेबसाइट, देश की विभिन्न संस्थान और कई अन्य बड़े-बडे़ बदलाव भी करने होंगे। इन सबका अपना अलग-अलग खर्चा होगा। 


कैसे तय किया जाएगा खर्च 
इस साल की शुरुआत में औरंगाबाद का नाम बदलकर छत्रपति संभाजी नगर रखा गया था। उसी वक्त उस्मानाबाद का नाम बदलकर धाराशिव कर दिया गया था। साल 2016 में हरियाणा सरकार ने गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम कर दिया था। वहीं साल 2018 में यूपी सरकार ने इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज कर दिया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इलाहाबाद का नाम बदलने पर राज्य सरकार को 300 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आया था। बहरहाल, भारत का नाम बदला जाएगा या नहीं। इस पर सरकार की तरफ से अभी कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जाहिर सी बात है जब किसी शहर या राज्य का नाम बदलने पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं तो देश का नाम बदलने पर उससे कहीं ज्यादा खर्च होगा।

लगभग 14 हजार करोड़ हो सकते हैं खर्च

आउटलुक ने इसी पर एक रिसर्च स्टोरी की है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2018 में स्वाजीलैंड नाम के एक अफ्रीकी देश ने अपना नाम बदलकर ईस्वातिनी कर लिया था। उस वक्त इस छोटे से देश का नाम बदलने में लगभग 60 मिलियन डॉलर का खर्च आया था। जिस मॉडल के आधार पर इस आंकड़े की गणना की गई है, उसी आधार पर अगर अपने देश का नाम चेंज किया गया तो खर्च लगभग 14 हजार करोड़ रुपये के आस पास होगा।