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बिलकिस बानो के गुनहगारों को नहीं मिली मोहलत, 21 जनवरी तक करना होगा आत्मसमर्पण

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द फॉलोअप नेशनल डेस्क:

गुजरात के बहुचर्चित बिलकिस बानो रेप केस के दोषियों को 21 जनवरी तक आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया गया है। गुजरात सरकार द्वारा दोषियों की रिहाई के फैसले के निरस्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने इन्हें आत्मसमर्पण करने को कहा था। इस बीच दोषियों ने मांग की थी कि आत्मसमर्पण के लिए उनको 4 हफ्ते का समय दिया जाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मोहलत वाली याचिका खारिज कर दी है। दरअसल, जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। 

जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने ठुकराई याचिका
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताते हुए कहा कि रविवार तक सभी दोषी जेल अधिकारियों को रिपोर्ट करें। दरअसल, दोषियों ने रिहाई रद्द होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कई मांगें रखी थी। मामले में सजायाक्ता गोविंदभाई नाई ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की उम्र 88 साल जबकि मां 75 साल की हैं। परिवार में केवल वही देखभाल करने वाले व्यक्ति हैं इसलिए उनको समय दिया जाएगा। वहीं रूपाभाई चंदना ने कहा कि उनको बेटे की शादी में शामिल होना है इसलिए आत्मसमर्पण की मोहलत दी जाए। मितेश चिमनाल भट्ट ने कहा कि उनकी सर्दियों वाली फसल कटने को तैयार है। उनको यह काम पूरा करने का समय दिया जाए। प्रदीप रमणलाल मोढिया ने तर्क दिया कि उनके फेफड़े की सर्जरी हुई है। उनको आराम की जरूरत है। 

15 अगस्त 2022 को रिहा किए गये थे बिलकिस बानो के दोषी
गौरतलब है कि गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को 15 अगस्त 2022 को माफी नीति के तहत गोधरा उपजेल से रिहा कर दिया था। गुजरात सरकार का कहना था कि दोषियों के अच्छे व्यवहार की वजह से यह फैसला लिया गया है। हालांकि, इस आदेश के खिलाफ पीड़िता बिलकिस बानों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। सुप्रीम कोर्ट ने मई 203 में गुजरात सरकार को 9 जुलाई 1992 की माफी नीति के मुताबिक समय से पहले रिहाई के आवेदन पर विचार करने का निर्दश दिया ता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इसपर 2 महीने में फैसला लिया जा सकता है। 

3 मार्च 2002 को बिलकिस बानो के साथ हुआ था रेप
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2002 के गुजरात दंगों के दौरान 2 मार्च को दाहोद जिले के रंधिकापुर गांव में बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप हुआ था। उनके परिवार के 7 सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। घटना के समय बिलकिस बानो 5 माह की गर्भवती थी। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई के आदेश के रद्द करते हुए कहा कि गुजरात सरकार को दोषियों को रिहा करने का अधिकार ही नहीं था क्योंकि उन्हें सजा बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाई थी।